लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन के 6 माह पूरे: गरीबों के आशियाने बचाने महिलाएं डटीं, गार्डन और कॉम्प्लेक्स निर्माण के विरोध में प्रदर्शन जारी

बिलासपुर। लिंगियाडीह में चल रहा लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन रविवार को छह महीने पूरे कर गया। अपने घर और रोजी-रोटी को बचाने के लिए यहां के 136 गरीब परिवारों की महिलाएं पिछले छह महीनों से लगातार धरने पर बैठी हुई हैं। भीषण गर्मी, धूल और कठिन परिस्थितियों के बावजूद आंदोलनकारी महिलाएं अपने हक की लड़ाई लड़ रही हैं, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि शहर विकास के नाम पर वर्षों पुरानी बस्तियों को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि अपोलो रोड की सड़कें पहले ही पर्याप्त चौड़ी हो चुकी हैं, इसके बावजूद गरीब परिवारों को हटाकर वहां गार्डन और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना बनाई जा रही है। आंदोलनकारियों ने इसे गरीबों के साथ अन्याय और छल बताया है।
धरने पर बैठी महिलाओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बस्तियां हटाई जाती हैं तो न केवल उनका आशियाना छिन जाएगा, बल्कि उनकी आजीविका भी खत्म हो जाएगी। कई परिवार छोटे-छोटे दुकानों के माध्यम से अपना जीवनयापन करते हैं, जबकि कई महिलाएं सब्जी बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। ऐसे में विस्थापन की स्थिति में उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।
आंदोलन को अब तक कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिल चुका है। विभिन्न संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने आंदोलनकारियों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से सकारात्मक पहल करने की मांग की है। इसके बावजूद प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे आंदोलनकारियों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
धरना स्थल पर पिछले छह महीनों से नारी शक्ति की बड़ी भागीदारी देखने को मिल रही है। आंदोलन में यशोदा पाटिल, रामबाई, राधा साहू, रामौतिन, सूरजबाई, कुमारी निषाद, संतोषी यादव, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, फुलबाई साहू, पिंकी देवांगन, अनिता पाटिल, उर्मिला पाटिल, लीला पाटिल, रूपा सरकार, सरस्वती देवांगन, पुष्पा देवांगन, लता देवांगन, राजकुमारी देवांगन, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, सनी अहिरवार, चंद्रमा अहिरवार, जयकुमार अहिरवार, पीहरिया केवट, सोनबाई, कुंडिया केवट, सोनिया केवट, नंदनी ध्रुव, पिंकी बाई चौहान, प्रमिला ध्रुव, रानी देवांगन, साधना यादव, चंद्रकली निषाद, सीता साहू, सुशीला साहू, सुवासिन साहू, कुमारी यादव, अमेरिका श्रीवास, नंदकुमारी देवांगन, अनीता ध्रुव, रूपा देवी, गायत्री देवांगन, सहोदर गोड, सीता केवट, जानकी देवांगन, सोनिया मानिकपुरी, कौशल्या मानिकपुरी, मालती मानिकपुरी, मरजीना बेगम, सरस्वती यादव, वंदना डे, खोलबहरीन यादव, अनूपा श्रीवास, सुशीला श्रीवास, रामबाई मानिकपुरी, दुर्गा श्रीवास, सावित्री यादव, सुखमति मानिकपुरी, मीरा, शिवकुमारी देवांगन, अर्पणा पटेल, हेमलता देवांगन, सरिता राजपूत, मालती यादव, संतोष सहित बड़ी संख्या में महिलाएं लगातार शामिल हो रही हैं।
धरना स्थल पर महिलाओं की यह एकजुटता आंदोलन को मजबूती दे रही है। वहीं प्रशासन की लगातार चुप्पी के चलते आने वाले दिनों में आंदोलन के और उग्र होने के संकेत मिल रहे हैं।