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प्रेस कॉन्फ्रेंसबिलासपुर

42 की उम्र में सपनों को दी नई उड़ान: बिलासपुर की एंजल चौकसे बनीं ‘मिसेज इंडिया इंटरनेशनल क्वीन 2026’ 
7 देशों की प्रतिभागियों को पछाड़कर बिलासपुर का नाम रोशन किया; जीत का श्रेय परिवार को दिया

बिलासपुर। बिलासपुर शहर की एंजल चौकसे ने “मिसेज इंडिया इंटरनेशनल क्वीन 2026 (Alluring)” का खिताब जीतकर शहर सहित पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश को गौरवान्वित किया है। इस उपलब्धि के बाद शहर के एक निजी होटल में आयोजित प्रेसवार्ता के दौरान उन्होंने अपने इस प्रेरणादायक सफर के अनुभव साझा किए।

स्क्रॉल करते विज्ञापन से शुरू हुआ अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर

एंजल चौकसे ने बताया कि इस पूरे सफर की शुरुआत बेहद साधारण तरीके से हुई। मोबाइल पर सोशल मीडिया स्क्रॉल करते हुए उन्हें प्रतियोगिता का एक विज्ञापन दिखा। जब उन्होंने इसके बारे में अपने पति रितेश चौकसे से चर्चा की, तो उन्होंने बिना देर किए तुरंत ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन करा दिया।

इसके बाद कंपनी द्वारा प्राथमिक सवाल-जवाब और फोटो मंगवाने के बाद डायरेक्टर ने जूम मीट के जरिए इंटरव्यू लिया। एंजल ने देश-विदेश के प्रतिभागियों के बीच अपनी जगह बनाते हुए टॉप-91 में प्रवेश किया।


कठिन ग्रूमिंग और 7 देशों का मुकाबला


प्रतियोगिता के फाइनल राउंड के लिए उन्हें दिल्ली बुलाया गया, जहाँ होटल लीला इंटरनेशनल में 5 दिनों तक यह भव्य आयोजन चला। इसमें भारत सहित सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया, दुबई, कतर, अमेरिका (USA) और लंदन से आई प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने अपनी कठिन ट्रेनिंग के बारे में बतलाते हुए कहती है कि दिनचर्या सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक चलने वाले विभिन्न राउंड्स होते थे। जिसमें प्रमुख राउंड कैटवॉक, टैलेंट राउंड, इंट्रोडक्शन, प्रश्नोत्तर, ग्रूमिंग और पर्सनैलिटी असेसमेंट आदि। उन्होंने बताया कि 42 वर्ष की उम्र में एक परफेक्ट पार्सनलटी बनाए रखना बड़ी चुनौती थी लेकिन कड़ी मेहनत, अनुशासन और संतुलित आहार से उन्होंने यह कर दिखाया और कड़े मुकाबले के बीच सभी चरणों को आत्मविश्वास के साथ पार करते हुए एंजल चौकसे ने “Mrs. India International Queen Alluring 2026″ का ताज अपने नाम किया।

सपनों की कोई उम्र नहीं होती: एंजल चौकसे

“कॉलेज के दिनों में मुझे ‘Miss Home Science’ का खिताब मिला था, तभी से इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना था। शादी के बाद जिम्मेदारियों के बीच सपना पीछे छूट गया था, लेकिन मेरे पति और परिवार ने इसे मरने नहीं दिया। यह सम्मान केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरे बिलासपुर और छत्तीसगढ़ का है। मैं सभी महिलाओं से कहना चाहती हूँ कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती; जुनून और परिवार के साथ से हर पड़ाव पर सपने सच किए जा सकते हैं।”
— एंजल चौकसे

जीत का श्रेय परिवार को, आगे मिले हैं ब्रांड ऑफर

एंजल ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय अपने पति रितेश चौकसे, बेटी विनस चौकसे, माता-पिता और सास-ससुर को देते हुए कहा कि परिवार के त्याग, सपोर्ट और विश्वास के बिना इस अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचना संभव नहीं था।

उन्होंने यह भी जानकारी दी कि प्रतियोगिता जीतने के बाद दो बड़े ब्रांड्स ने उन्हें अप्रोच किया है। हालांकि अभी उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया है, लेकिन भविष्य में अच्छे प्रपोजल मिलने पर वे आगे काम जरूर करेंगी।