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बिलासपुरबिल्हा

•केंद्रीय मंत्री तोखन साहू से डी. पी.विप्र महाविद्यालय एटोनोमस समित के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल एवं नागरिकों ने ज्ञापन सौंपा • कुलपति को नागरिकों के समक्ष प्रत्यक्ष चर्चा हेतु चुनौती

बिलासपुर। डी .पी. विप्र महाविद्यालय के आटोनोमस कमेटी के अध्यक्ष राज कुमार अग्रवाल ने वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री तोखन साहू को नागरिक सभा एवं सर्व दलीय मंच के साथ ज्ञापन सौंपकर विश्व विद्यालय के कुलपति ए डी एन बाजपेई द्वारा नियम विरूद्ध कार्य करने और छत्तीसगढ़ एवं शिक्षा विरोधी कदमों से अवगत कराया।

ज्ञात हो कि अटल बिहारी बाजपेई वि वि के कुलपति एडीएन बाजपेयी के द्वारा भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नई शिक्षा नीति का विरोध करते हुए नेक से 2 बार “ए “ग्रेड प्राप्त डी पी कॉलेज को विश्व विद्यालय अनुदान आयोग द्वारा आटोनामस (स्वायत्त) घोषित होने के बाद भी उनके निर्देशों की अवहेलना कर अधिसूचना जारी न करने और भ्रम का वातावरण बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जिससे छात्रों और पालकों में रोष बढ़ता जा रहा है। उनका यह कुत्सित प्रयास नई शिक्षा नीति का घोर उल्लंघन करते हुए मनमानी करने का परिचायक है।

तोखन साहू केंद्रीय मंत्री ने इस मामले पर गंभीरता पूर्वक संज्ञान में ले कर डी पी कॉलेज को स्वायत्तता देने में पूर्ण सहयोग करने की बात कही।

उल्लेखनीय है कि कुलपति द्वारा महाविद्यालय की उन्नति से ईर्ष्या और अपनी नाकामियों को छिपाने के लिये बहादुरों पूरे क्षेत्र के छात्रों, पालकों, जन प्रतिनिधियों और नागरिकों को धता बताते हुये उच्च शिक्षा से वंचित करने का निंदनीय प्रयास किया जा रहा है।

यह भी उल्लेखनीय है कि कुलपति ने छात्रों के बीच भ्रम फैलाने के लिये उसके स्वायत्त घोषित होने के बावजूद पोर्टल पर विश्व विद्यालय द्वारा अधिसूचित न करने की सूचना डाली है जबकी उन्हे यू जी सी ने तीस दिनों के अंदर अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है। यू जी सी के निर्देशों की अवहेलना कर अपने स्वार्थ में छत्तीसगढ़ के छात्रों के विरूद्ध षड्यंत्र करने वाले कुलपति को तत्काल हटाने की मांग भी की जा रही है।

ऑटोनॉमस समिति के अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल ने कहा कि कुलपति के निम्न स्तरीय कार्यकलापों से विश्वविद्यालय और क्षेत्र में निरंतर रोष बढ़ता जा रहा है। नियमों का उलंघन करना, खुले आम भ्रष्टाचार, महिला प्रताड़ना, शिक्षकों से दुर्व्यवहार और चापलूस सलाहकारों के साथ जन प्रतिनिधियों की अवहेलना से स्थिति और भी विस्फोटक हो रही है।

कुलपति हिम्मत है और गलत नहीं हैं तो निम्न प्रश्नों का जवाब तुरंत दें..

१) क्या डी पी विप्र महाविद्यालय को नैक द्वारा लगातार दो बार “A” ग्रेड मिलने वाला क्षेत्र का अकेला महाविद्यालय नहीं है?

२) क्या डी पी विप्र महाविद्यालय को यू जी सी के द्वारा स्वायत्त महाविद्यालय का दर्जा प्रदान नहीं की किया गया है?

३) क्या यू जी सी ने विश्व विद्यालय को छात्र हीत में 30 दिनों के भीतर अधिसूचना जारी करने का आदेश नहीं है दिया है?

४) क्या इस संबंध में यू जी सी का निर्णय अंतिम रुप से मान्य नहीं है?

५) किस नियम के अंतर्गत विश्व विद्यालय यू जी सी के निर्णय पर स्पष्टीकरण या पुनर्विचार या रुकावट डाल सकता है?

६) क्या विश्व विद्यालय के अवैध पत्र पर यू जी सी ने कोई स्टे या पुनर्विचार का पत्र दिया है?

इन प्रश्नों का जवाब दें कुलपति और अफवाह फैलाने का अपराधिक कार्य बंद करें।
हम किसी भी प्रत्यक्ष चर्चा कर अपना पक्ष साबित करने के लिये तत्पर हैं तो कुलपति क्यों भाग रहे हैं।