
गरियाबंद: गरियाबंद जिले के देवभोग थाना क्षेत्र अंतर्गत उरमाल गांव में आयोजित छह दिवसीय ओपेरा कार्यक्रम अब प्रशासन के लिए मुश्किलें खड़ी करता नजर आ रहा है। कार्यक्रम के दौरान मंच पर कथित अशोभनीय प्रस्तुतियों और दर्शकों के आपत्तिजनक व्यवहार के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया है।अनुमति के बाद हुआ आयोजन, फिर भी उठा विवाद
जानकारी के मुताबिक उरमाल गांव की युवा समिति ने मैनपुर एसडीएम कार्यालय से विधिवत अनुमति लेकर छह दिवसीय ओपेरा कार्यक्रम का आयोजन किया था। इसके लिए ओडिशा से कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। आरोप है कि कार्यक्रम के दौरान मंच पर मर्यादा के खिलाफ प्रस्तुतियां दी गईं, जिन पर दर्शकों की प्रतिक्रिया भी आपत्तिजनक रही।
वायरल वीडियो में मैनपुर एसडीएम तुलसी दास मरकाम कार्यक्रम स्थल पर मौजूद नजर आ रहे हैं। वहीं दो पुलिसकर्मी भी मंच के पास अनुचित व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। इससे आयोजन की निगरानी और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े हो गए हैं।
रात 11 बजे से तड़के 3 बजे तक चला कार्यक्रम
बताया जा रहा है कि 8 और 9 जनवरी की रात बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम देखने पहुंचे थे। 9 जनवरी को एसडीएम के मौके पर पहुंचने की भी पुष्टि हुई है। वीडियो फुटेज में देर रात तक मंचीय गतिविधियां चलते हुए दिखाई दे रही हैं, जहां अधिकारी, पुलिसकर्मी, जनप्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद थे।
वीडियो वायरल होते ही पुलिस ने की कार्रवाई
10 जनवरी को वीडियो सामने आने के बाद देवभोग पुलिस हरकत में आई। थाना प्रभारी फैजुल शाह ने बताया कि वीडियो में दिख रहे दो पुलिसकर्मियों को तत्काल लाइन अटैच कर दिया गया है। वहीं आयोजन से जुड़े देवेंद्र राजपूत, गोविंद देवांगन, नरेंद्र साहू और हसन डाडा के खिलाफ बीएनएस की धारा 296 (3)(5) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया, जिन्हें बाद में मुचलके पर रिहा कर दिया गया।
एसडीएम की भूमिका की जांच की मांग
मामले को लेकर एक स्थानीय युवक ने थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें कार्यक्रम की अनुमति देने और मौके पर मौजूद रहने को लेकर एसडीएम की भूमिका की जांच की मांग की गई है। जानकारी के अनुसार, आयोजन की अनुमति 10 जनवरी तक थी, लेकिन विवाद बढ़ने के बाद उसी दिन कार्यक्रम बंद करवा दिया गया।
प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल
यह मामला अब सिर्फ एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है। इससे यह सवाल खड़ा हो रहा है कि ऐसे आयोजनों की निगरानी, मर्यादा बनाए रखने और नियमों के पालन की जिम्मेदारी किसकी थी। वायरल वीडियो ने प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदार पदों पर बैठे अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नोट : वायरल वीडियो की हम पुष्टि नहीं करते।