कोटा वन क्षेत्र में अवैध उत्खनन का मामला विधानसभा में गूंजा

कोटा। कोटा वन क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे अवैध उत्खनन का मुद्दा अब विधानसभा तक पहुंच गया है। क्षेत्र के विधायक अटल श्रीवास्तव ने सदन में इस गंभीर समस्या को जोरदार तरीके से उठाते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।

विधायक ने कहा कि कोटा क्षेत्र के आमागोहन, खोड़ी, खोगसरा, करहीकछार, कोचरा, जारगा, पकरीया, पीपरखूंटी, केवची और ठाड़पथरा सहित कई वन ग्रामों में रेत माफियाओं द्वारा बिना रॉयल्टी पर्ची के खुलेआम अवैध उत्खनन किया जा रहा है। यह गतिविधियां पेशा एक्ट के तहत संरक्षित वन क्षेत्रों में भी जारी हैं, जिससे पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्व, वन और खनिज विभाग के अधिकारियों को इन गतिविधियों की पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे माफियाओं के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं और ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ रहा है।

विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि रतनपुर– केवची– जबलपुर नेशनल हाईवे के निर्माण कार्य में लगे ठेकेदार द्वारा जंगल, तालाब और पहाड़ों से अवैध रूप से मिट्टी, रेत और अन्य निर्माण सामग्री का उत्खनन कर उसका उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने निर्माण कार्य में लापरवाही और अनियमितताओं की भी शिकायत की।

ग्रामीणों द्वारा विरोध करने और शिकायत दर्ज कराने पर उनसे दुर्व्यवहार और धमकी दिए जाने की बात भी विधायक ने सदन में उठाई। उन्होंने सरकार से तत्काल जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की, ताकि वन संपदा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा की जा सके।

इस मुद्दे के विधानसभा में गूंजने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की उम्मीद बढ़ गई है और क्षेत्र के लोगों की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।