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लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन के 188 दिन पूरे: तपती धूप में भी डटीं महिलाएं, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप

बिलासपुर। लिंगियाडीह में चल रहा लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन गुरुवार को 188वें दिन में प्रवेश कर गया। अपने आशियाने और रोजी-रोटी को बचाने के लिए यहां के 136 गरीब परिवारों की महिलाएं पिछले कई महीनों से लगातार धरने पर बैठी हुई हैं। भीषण गर्मी और तपती धूप के बावजूद आंदोलनकारियों का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है, लेकिन अब तक प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर कोई ठोस पहल नहीं की गई है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि शहर विकास के नाम पर वर्षों पुरानी बस्तियों को उजाड़ा जा रहा है, जो पूरी तरह अन्यायपूर्ण है। उनका तर्क है कि अपोलो रोड की सड़कें पहले ही पर्याप्त चौड़ी हो चुकी हैं, इसके बावजूद वहां बसे गरीब परिवारों को हटाकर बेघर करने की तैयारी की जा रही है।

धरने पर बैठी महिलाओं और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बस्तियां हटाई जाती हैं तो न केवल उनका आशियाना छिन जाएगा, बल्कि उनकी आजीविका भी खत्म हो जाएगी। कई परिवार छोटे-छोटे दुकानों के जरिए अपना जीवनयापन करते हैं, वहीं कई महिलाएं सब्जी बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं। ऐसे में विस्थापन की स्थिति में उनके सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा।

आंदोलन को अब तक कई सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का समर्थन मिल चुका है। विभिन्न संगठनों ने आंदोलनकारियों की मांगों को जायज बताते हुए प्रशासन से सकारात्मक पहल करने की मांग की है। इसके बावजूद प्रशासन और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

धरना स्थल पर गुरुवार को भी बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। इनमें यशोदा पाटिल, रामबाई, राधा साहू, रामौतिन, सूरजबाई, कुमारी निषाद, संतोषी यादव, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, फुलबाई साहू, पिंकी देवांगन, अनिता पाटिल, उर्मिला पाटिल, लीला पाटिल, रूपा सरकार, सरस्वती देवांगन, पुष्पा देवांगन, लता देवांगन, राजकुमारी देवांगन, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, सनी अहिरवार, चंद्रमा अहिरवार, जयकुमार अहिरवार, पीहरिया केवट, सोनबाई, कुंडिया केवट, सोनिया केवट, नंदनी ध्रुव, पिंकी बाई चौहान, प्रमिला ध्रुव, रानी देवांगन, साधना यादव, चंद्रकली निषाद, सीता साहू, सुशीला साहू, सुवासिन साहू, कुमारी यादव, अमेरिका श्रीवास, नंदकुमारी देवांगन, अनीता ध्रुव, रूपा देवी, गायत्री देवांगन, सहोदर गोड, सीता केवट, जानकी देवांगन, सोनिया मानिकपुरी, कौशल्या मानिकपुरी, मालती मानिकपुरी, मरजीना बेगम, सरस्वती यादव, वंदना डे, खोलबहरीन यादव, अनूपा श्रीवास, सुशीला श्रीवास, रामबाई मानिकपुरी, दुर्गा श्रीवास, सावित्री यादव, सुखमति मानिकपुरी, मीरा, शिवकुमारी देवांगन, अर्पणा पटेल, हेमलता देवांगन, सरिता राजपूत, मालती यादव, संतोष सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल रहीं।

धरना स्थल पर महिलाओं की यह एकजुटता आंदोलन को लगातार मजबूती दे रही है। वहीं प्रशासन की चुप्पी के चलते आने वाले दिनों में आंदोलन के और उग्र होने की संभावना जताई जा रही है।