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पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन, लोककला जगत में शोक की लहर

रायपुर। छत्तीसगढ़ की गौरव, विश्वविख्यात पंडवानी गायिका और पद्म विभूषण से सम्मानित डॉ. तीजन बाई का लंबी बीमारी के बाद शनिवार तड़के निधन हो गया। उन्होंने रायपुर स्थित एम्स अस्पताल में सुबह 3:15 बजे अंतिम सांस ली। वे 70 वर्ष की थीं।

डॉ. तीजन बाई ने अपनी सशक्त आवाज़, प्रभावशाली अभिनय और अनूठी प्रस्तुति शैली के माध्यम से पंडवानी गायन को देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को जीवंत अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी कला ने उन्हें लोकसंगीत की दुनिया में विशिष्ट स्थान दिलाया।

लोककला के क्षेत्र में उनके अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 1988 में पद्म श्री, 2003 में पद्म भूषण और 2019 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। इसके अलावा उन्हें 1995 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार सहित अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया।

डॉ. तीजन बाई का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था, लेकिन अपनी प्रतिभा, संघर्ष और समर्पण के बल पर उन्होंने पंडवानी को विश्व मंच तक पहुंचाया। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपरा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उनके निधन की खबर से कला जगत, साहित्यकारों, सांस्कृतिक संस्थाओं और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक हस्तियों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे भारतीय लोक संस्कृति के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।

डॉ. तीजन बाई का निधन केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि पूरे देश की लोककला के लिए एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। उनकी आवाज़, उनकी शैली और उनकी कला आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी।