बिलासपुर के कोनी में नवनिर्मित सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल को अब PPP मॉडल पर सौंपने की सरकार की तैयारी, शासकीय दस्तावेजों से हुआ खुलासा, कांग्रेस ने उठाए तीखे सवाल
“जनता को सिर्फ उद्घाटन और आश्वासन नहीं, बल्कि इलाज चाहिए।” – विजय केशरवानी
बिलासपुर।बिलासपुर के कोनी में जनता के पैसे से निर्मित 240 बेड के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बेड के कैंसर केयर अस्पताल को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष व बेलतरा विधानसभा प्रत्याशी विजय केशरवानी ने एक प्रेस वार्ता आयोजित कर राज्य सरकार और स्थानीय भाजपा विधायक को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सरकारी दस्तावेजों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि जनता की गाढ़ी कमाई और सरकारी जमीन पर बने इस भव्य अस्पताल को निजी हाथों (PPP मॉडल) में सौंपने की साजिश रची जा रही है।
प्रधानमंत्री के उद्घाटन के डेढ़ साल बाद भी इलाज का इंतजार
श्री विजय केशरवानी ने कहा कि 29 अक्टूबर 2024 को देश के प्रधानमंत्री द्वारा इस अस्पताल का भव्य उद्घाटन किया गया था। इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी इसका निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। बिलासपुर संभाग की जनता को उम्मीद थी कि अब उन्हें गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए बड़े शहरों की ओर नहीं भागना पड़ेगा। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी यह अस्पताल पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहा है। आज भी विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी है, जिसके कारण गंभीर मरीजों को दूसरे अस्पतालों में रेफर किया जा रहा है।

“जनता को सिर्फ उद्घाटन और आश्वासन नहीं, बल्कि इलाज चाहिए।” – विजय केशरवानी
सरकारी दस्तावेजों से खुला PPP मॉडल का राज
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता ने चिकित्सा शिक्षा विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के शासकीय दस्तावेजों (दिनांक 10-06-2026 और 26-06-2026 के पत्र) का हवाला देते हुए कई गंभीर सवाल खड़े किए।
इन दस्तावेजों में अस्पताल के संचालन के लिए PPP (Public-Private Partnership)मॉडल की निविदा प्रक्रिया, Revised RFP, Revised License Agreement और Financial Modelling का स्पष्ट उल्लेख है।
इस पूरी प्रक्रिया के लिए बहुराष्ट्रीय कंसलटेंट संस्था KPMG को नियुक्त किया गया है, जो टेंडर प्रोसेसिंग कमेटी (TPC) के साथ मिलकर काम कर रही है।
सरकार से पूछे गए 6 तीखे सवाल:
1. जब जमीन, भवन, मशीनें और सारा संसाधन जनता के पैसे (₹200 करोड़) से बना है, तो निजी भागीदारी की क्या आवश्यकता है?
2. PPP मॉडल लागू होने के बाद अस्पताल का नियंत्रण किसके हाथों में रहेगा?
3. इलाज की दरें कौन तय करेगा? क्या गरीब, मजदूर और किसान यहाँ मुफ्त इलाज पा सकेंगे?
4. आयुष्मान भारत योजना के दायरे से बाहर के सामान्य मध्यमवर्गीय मरीजों के लिए क्या रियायत होगी?
5. यदि निजी प्रबंधन के आने के बाद मरीजों को परेशानी होती है, तो जवाबदेही किसकी होगी?
6. PPP समझौते की महत्वपूर्ण शर्तों और दस्तावेजों को जनता के सामने सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?
विधायक सुशांत शुक्ला के बयान पर पलटवार
बेलतरा के वर्तमान भाजपा विधायक सुशांत शुक्ला द्वारा उठाए गए मुद्दों पर पलटवार करते हुए केशरवानी ने कहा कि विधायक जी जनहित के जरूरी सवालों का जवाब देने के बजाय पुराने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में उलझा रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि आज राज्य में भाजपा की सरकार है, इसलिए अस्पताल की अव्यवस्था और निजीकरण के फैसलों पर जवाबदेही भी वर्तमान सरकार की ही बनती है।
स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम और जनभावना का अपमान
कांग्रेस ने कहा कि इस अस्पताल का नाम जनप्रिय नेता स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव जी के नाम पर रखा गया है, जो जनता के विश्वास और सेवा के प्रतीक हैं। लेकिन सरकार इसे निजी हाथों में सौंपकर उनके नाम और जनभावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रही है। क्या यह नाम सिर्फ राजनीति और बोर्ड लगाने तक सीमित रहेगा या गरीबों को वास्तव में प्राथमिकता मिलेगी?
कांग्रेस पार्टी की प्रमुख माँगें
प्रेस वार्ता के अंत में विजय केशरवानी ने छत्तीसगढ़ सरकार के सामने पाँच प्रमुख माँगें रखीं:
1. ₹200 करोड़ की लागत से बने इस अस्पताल को तत्काल पूरी क्षमता के साथ सरकारी तौर पर संचालित किया जाए।
2. डॉक्टरों, नर्सिंग, पैरामेडिकल और तकनीकी कर्मचारियों के स्वीकृत पदों पर तत्काल नियमित भर्ती की जाए।
3. आईसीयू, कैथलैब, ऑक्सीजन प्लांट, इमरजेंसी और हाई-टेक एंबुलेंस की सुविधाएं तुरंत बहाल की जाएं।
4. PPP मॉडल लागू करने से पहले गरीब और आम मरीजों के मुफ्त व सुलभ इलाज की लिखित कानूनी गारंटी दी जाए।
5. PPP से जुड़े KPMG के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज और शर्तें श्वेत पत्र के माध्यम से जनता के सामने सार्वजनिक की जाएं।
कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी ने चेतावनी दी है कि यह बिलासपुर की जनता के स्वास्थ्य के अधिकार की लड़ाई है। इस अस्पताल पर पहला हक यहाँ की गरीब जनता का है और इसे किसी भी सूरत में निजी मुनाफे की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। यदि सरकार ने जल्द ही स्थिति स्पष्ट नहीं की, तो सड़क से सदन तक उग्र आंदोलन किया जाएगा।
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