अपोलो अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था पर उठे सवाल; कांग्रेस नेताओं ने कहा, “बिलासपुर का दाना-पानी खाते-पीते हो, थोड़ा तो शर्म करो”

बिलासपुर। शहर के अपोलो अस्पताल की आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गंभीर मरीज राजकुमार अग्रवाल को हायर सेंटर रेफर किए जाने के दौरान अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर परिजनों और कांग्रेस नेताओं ने गंभीर आरोप लगाए हैं।

आरोप है कि अस्पताल की दोनों एम्बुलेंस पिछले करीब तीन महीने से खराब होकर खड़ी हैं और इतने बड़े निजी अस्पताल में कोई वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं की गई। बताया गया कि मरीज को एयरलिफ्ट के लिए चकरभाठा एयरपोर्ट ले जाना था, लेकिन अस्पताल ने अपना कोई डॉक्टर, नर्स या मेडिकल स्टाफ साथ भेजने से इनकार कर दिया। प्रबंधन ने इसे अपनी आंतरिक नीति बताते हुए परिजनों को निजी एम्बुलेंस की व्यवस्था स्वयं करने को कहा।

मामले को गंभीर मानते हुए शुक्रवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा, पूर्व विधायक शैलेश पांडेय, पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी, विजय पांडेय, राजेश पांडेय, प्रमोद नायक और समीर अहमद के नेतृत्व में कांग्रेस का प्रतिनिधिमंडल अपोलो अस्पताल पहुंचा।
प्रतिनिधिमंडल के पहुंचने पर अस्पताल के सीईओ मौजूद नहीं थे। इसके बाद कांग्रेस नेताओं ने मेडिकल सुपरिंटेंडेंट (एमएस) से पूरे मामले में जवाब मांगा। चर्चा के दौरान एमएस ने अस्पताल की दोनों एम्बुलेंस पिछले तीन महीने से खराब होने की बात स्वीकार की, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।
गंभीर मरीज के साथ डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ नहीं भेजने के सवाल पर मेडिकल सुपरिंटेंडेंट ने कहा कि “निजी एम्बुलेंस में अस्पताल का स्टाफ नहीं भेजा जा सकता, यह अस्पताल के नियमों के विरुद्ध है।”
इस जवाब पर कांग्रेस नेताओं ने कड़ी नाराजगी जताई। उनका कहना था कि अस्पताल को नियमों से पहले मरीज की जान को प्राथमिकता देनी चाहिए। नेताओं ने कहा, “बिलासपुर का दाना-पानी खाते-पीते हो, थोड़ा तो शर्म करो। प्रबंधन यह बताए कि मरीज की जान ज्यादा कीमती है या अस्पताल का नियम?”
कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।