बिलासपुर में फूड पॉइजनिंग का बड़ा मामला: मेला में गुपचुप खाने से एक ही परिवार के 7 सदस्य बीमार, सिम्स में भर्ती

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में दुर्गा दर्शन के दौरान एक दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के सीएमडी कॉलेज मैदान में लगे मेले के दौरान ठेले पर गुपचुप (पानी पुरी) खाने से एक ही परिवार के 7 लोग गंभीर रूप से फूड पॉइजनिंग (Food Poisoning) के शिकार हो गए। तबीयत बिगड़ने के बाद सभी को तत्काल सिम्स (SIMS) अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
घटना का विवरण
सकरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम परसदा निवासी महेश साहू अपने परिवार के साथ अष्टमी की रात मां दुर्गा की प्रतिमाओं के दर्शन करने और मेला घूमने बिलासपुर आए थे। रात करीब 12 बजे परिवार के सभी सदस्य सीएमडी कॉलेज मैदान पहुंचे।
दर्शन करने के बाद उन्होंने मैदान में ही एक ठेले पर गुपचुप खाया और अपने घर लौट गए। लेकिन घर पहुंचने के कुछ ही देर बाद और अगली सुबह उठते ही परिवार के सदस्यों को लगातार उल्टी, दस्त और घबराहट की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते परिवार के सभी 7 सदस्यों की तबीयत तेजी से बिगड़ गई, जिसके बाद हड़कंप मच गया।
पीड़ितों की सूची
फूड पॉइजनिंग की चपेट में आने वाले एक ही परिवार के सातों सदस्यों के नाम निम्नलिखित हैं:
* महेश साहू (32 वर्ष)
* संतोषी साहू (27 वर्ष)
* प्रभा साहू (26 वर्ष)
* सुमन साहू (18 वर्ष)
* सुजीता साहू (16 वर्ष)
* सोमेश साहू (15 वर्ष)
* शिवांश साहू (6 वर्ष)
बच्चों की हालत गंभीर, एनआईसीयू में इलाज
अस्पताल में भर्ती मरीजों में बच्चों की स्थिति ज्यादा चिंताजनक बनी हुई है। परिवार के 6 वर्षीय सबसे छोटे बच्चे शिवांश साहू की हालत अधिक खराब होने के कारण उसे एनआईसीयू (NICU) में भर्ती किया गया है। हालांकि, सिम्स के डॉक्टरों के मुताबिक, समय पर इलाज मिलने से फिलहाल सभी की हालत स्थिर है और उनपर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
फूड पॉइजनिंग का कारण: दूषित पानी और बासी मसाले
चिकित्सकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने प्राथमिक जांच के बाद इसे स्पष्ट रूप से फूड पॉइजनिंग करार दिया है। आशंका जताई जा रही है कि ठेले पर इस्तेमाल किया जाने वाला पानी दूषित था या उसमें मिलाए गए मसाले बासी थे, जिसके सेवन से यह संक्रमण फैला।
इस घटना के बाद शहर में खुले में स्ट्रीट फूड बेचने वाले ठेलों की साफ-सफाई और खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय नागरिकों और प्रशासनिक स्तर पर अब यह मांग उठने लगी है कि मेलों और बाजारों में लगने वाले खान-पान के स्टॉल्स की नियमित जांच की जाए ताकि आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ न हो।