बिलासपुर में सर्पदंश मुआवजा घोटाले का बड़ा खुलासा: फर्जी मौतें दिखाकर करोड़ों की सरकारी राशि हड़पी, डॉक्टर-वकील समेत मामले में शामिल कई लोगों पर एफआईआर दर्ज, सिम्स में पदस्थ आरोपी महिला डॉ.प्रियंका हुई गिरफ्तार

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में सर्पदंश (सांप काटने) से हुई मौतों के नाम पर करोड़ों रुपये के कथित मुआवजा घोटाले का खुलासा होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। जांच में सामने आया है कि बीमारी, जहर सेवन, सामान्य मृत्यु और अन्य कारणों से हुई मौतों को भी फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सर्पदंश से हुई मौत बताकर शासन से ₹6 लाख से ₹8 लाख तक की अनुग्रह सहायता राशि प्राप्त की गई।
प्रारंभिक जांच के बाद पुलिस ने अब तक 15 एफआईआर दर्ज की हैं। इस मामले में सिम्स (CIMS) की महिला डॉक्टर डॉ. प्रियंका सोनी, कई अधिवक्ताओं, आवेदकों तथा मृतकों के परिजनों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारियां की गई हैं। जांच एजेंसियों का कहना है कि मेडिकल रिकॉर्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों में कथित रूप से हेरफेर कर शासन से मुआवजा स्वीकृत कराया गया।
जांच के दौरान सामने आए आंकड़ों ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। विधानसभा में उठाए गए मुद्दे के अनुसार, सर्पदंश प्रभावित जिले जशपुर में तीन वर्षों के दौरान 96 मौतें दर्ज हुईं, जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें सर्पदंश से होना दर्शाकर करीब ₹17.24 करोड़ की मुआवजा राशि वितरित कर दी गई। इन असामान्य आंकड़ों के बाद शासन ने मामले की जांच शुरू कराई।
जांच में कई मामलों में यह पाया गया कि वास्तविक मृत्यु का कारण सर्पदंश नहीं था, बल्कि अन्य कारणों से हुई मौतों को फर्जी तरीके से सर्पदंश घोषित किया गया। इसके लिए कथित रूप से अस्पताल के दस्तावेज, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य अभिलेखों में बदलाव कर दावा प्रस्तुत किया गया। पुलिस का मानना है कि यह कार्य संगठित तरीके से किया गया, जिसमें कई लोगों की मिली भगत रही।
इस पूरे मामले को सबसे पहले बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने विधानसभा में प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने राजस्व विभाग की जांच पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि यह केवल कुछ मामलों तक सीमित नहीं है, बल्कि 400 से अधिक मामलों वाले संगठित रैकेट की आशंका है। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
पुलिस और प्रशासन का कहना है कि जांच अभी जारी है और दस्तावेजों की पड़ताल के आधार पर आने वाले दिनों में और भी एफआईआर तथा गिरफ्तारियां हो सकती हैं। यदि आरोप सिद्ध होते हैं तो सरकारी धन के दुरुपयोग, धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और दस्तावेजों में फर्जीवाड़े से संबंधित धाराओं के तहत आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।