
बिलासपुर : छठ पूजा के तीसरे दिन श्रद्धालु डूबते सूर्य को अर्घ्य देने के लिए छठघाट पहुंचे जहा हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने इक्कठे हो कर सूर्य को अर्घ्य दी ।


बिलासपुर में छठघाट पर श्रद्धालु एकत्र हो कर सूर्य को अर्द्ध देते है जिसके लिए छठ घाट समिति इस पर्व के महीनो पहले घाट की सफाई एवम अन्य व्यवस्थाओं में जुट जाते है, इस वर्ष श्रद्धालुओं के सुविधाओ के लिए समिति द्वारा नदी किनारे बैठने के लिए मेट, फ़ूड स्टॉल, कपड़े बदलनें के लिए चेंजिंग रूम, पुलिस कंट्रोल रूम, एम्बुलेंस एवम बच्चो के लिए झूले आदि की व्यवस्थाएं की है।


वही जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन द्वारा भी इस वर्ष यातायात की बेहतर व्यवस्था की गई थी जिससे छठघाट तक आने जाने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई असुविधाओ का सामना नही करना पड़ा।छठघाट में सूर्य को अर्द्ध देने विधायक शैलेष पांडेय की पत्नी रितु पांडेय भी पहुंची जिन्होंने निर्जला वर्त रख कर नगरवासियों के साथ छठ माता की पूजा अर्चना कर सूर्य देव को अर्द्ध दी।

वही विधायक शैलेष पांडेय अपने समर्थकों के साथ छठ पूजा में छ्ठघाट पधारे श्रद्धालु से भेट- मुलाकात कर सबको छ्ठपूजा की बधाई देते रहे। उनके साथ पंकज सिंह, शैलेंद्र जायसवाल, रामा बघेल, सुबोध सिंह आदि भी उपस्थित रहे।
•छठ पूजा एवम उसका महत्व•
छठ पूजा का व्रत में चार दिन तक निर्जला व्रत रखना पड़ता है. छठ व्रत की शुरुआत नहाए-खाय के साथ होती है. इसके बाद दूसरे दिन खरना और तीसरे दिन अस्ताचलगामी अर्घ्य की परंपरा निभाई जाती है. कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन भी व्रती महिलाएं उपवास रखती हैं और शाम को नदी के किनारे सूर्य को अर्घ्य देती हैं. जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है।ऐसी मान्यताएं हैं कि सूर्य की पत्नी का नाम प्रत्यूषा है और ये अर्घ्य उन्ही को दिया जाता है. शाम के समय अर्घ्य देने से संतान को दीर्घायु और सुख-संपन्नता का वरदान मिलता है.