
बिलासपुर। शहर में पहली बार प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा “आध्यात्मिक गीता ज्ञान महोत्सव” का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 2 से 8 नवंबर तक चलेगा, जिसमें श्रीमद्भगवद् गीता के उपदेशों के माध्यम से तनावमुक्त और खुशहाल जीवन जीने के सूत्र बताए जा रहे हैं।
प्रवचनकर्ता राजयोगिनी भारती दीदी ने प्रेसवार्ता में बताया कि श्रीमद्भगवद् गीता केवल एक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन का संपूर्ण दर्शन है। उन्होंने कहा—
“गीता में मानव जीवन की हर समस्या का सरल समाधान बताया गया है। लेकिन लोग इसे केवल पढ़ते हैं, अपनाते नहीं। जब हम गीता के उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करेंगे, तभी कष्टों से मुक्ति संभव है।”
उन्होंने आगे कहा कि गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने सिखाया है — “जो हो रहा है, वह अच्छा हो रहा है, जो होगा वह भी अच्छा ही होगा।”
लेकिन आज मनुष्य का मन इस सत्य को स्वीकार नहीं कर पाता, जिसके कारण जीवन तनावपूर्ण बना रहता है। यदि हम गीता के इस संदेश को समझ लें, तो जीवन की सभी टेंशन समाप्त हो जाएंगी।
कथा का उद्देश्य — आत्मज्ञान और चरित्र निर्माण
राजयोगिनी दीदी ने स्पष्ट किया कि भागवत कथा और भागवत गीता दो अलग बातें हैं। गीता आत्मा के ज्ञान और आत्मोन्नति की बात करती है। उन्होंने कहा—
“शरीर वस्त्र की तरह है और आत्मा वह वस्त्र है जो बदलता रहता है। भगवान निराकार हैं, उनसे मिलने के लिए शरीर के अभिमान को त्यागना होगा।”
उन्होंने बताया कि इस सात दिवसीय कथा का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि धर्म का सही अर्थ आत्मसाक्षात्कार है — जब मनुष्य स्वयं के भीतर झांकेगा, तभी समाज में झगड़े, ईर्ष्या और अशांति समाप्त होगी।
दीदी ने गीता के एक प्रमुख संदेश का उल्लेख करते हुए कहा—
“हे अर्जुन, उठो और युद्ध करो! यहाँ युद्ध का अर्थ बाहरी संघर्ष नहीं, बल्कि अपने भीतर की नकारात्मक शक्तियों से लड़ना है। जब हम स्वयं को सुधार लेते हैं, तभी समाज श्रेष्ठ बनता है।”
आयोजन की विशेषता
इस आयोजन में हर दिन गीता के अध्यायों के माध्यम से यह बताया जा रहा है कि आधुनिक युग की आपाधापी और तनाव के बीच भी किस प्रकार एक व्यक्ति खुशहाल, संयमित और आत्मनिर्भर जीवन जी सकता है।
“गीता केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन का मार्गदर्शक है,” दीदी ने कहा।
आयोजन स्थल: प्रजापति ब्रह्मकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सरकंडा,बिलासपुर
अवधि: 2 से 8 नवंबर
मुख्य विषय: “श्रीमद्भगवद् गीता का सार — खुशहाल जीवन का आधार”