मस्तूरी के दर्रीघाट में शासकीय भूमि का हो रहा है बंदरबाट, ग्रामवासियों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौप कर तहसीलदार की भूमिका की जांच की मांग की है ।

बिलासपुर : ग्राम पंचायत दर्रीघाट पटवारी हल्का नं 25 राजस्व निर्माण मंडल मस्तूरी के नागरिको ने आज जिला प्रशासन से तात्कालिक तहसीलदार के खिलाफ आवेदन देकर लिखित शिकायत दी है। उन्होंने अपनी शिकायत में लिखा है कि…

1. खसरा नं. 2018, 150 22.36.29,30,38. कि लगभग 200 एकड़ भूमि या तो निस्तार पत्र में दर्ज थी। अथवा आबंटित थी।
2. निस्तार पत्र, अधिकार अभिलेख मिसल और मूल नक्शे को बिना देखे राजस्व प्रकरण का विगत 2 वर्षों से निराकरण किया जा रहा है। आबंटन की कृषि भूमि का विक्रय डायवर्सन बैगेर सक्षम अनुमति के हो रहा है।
3.खसरा नं. 38 निस्तार पत्रक में दर्ज है। उक्त भूमि में 36 / 5 की भूमि को राजस्व प्राप्त अभिलेखों में छेड़-छाड़ उपरांत दर्ज कर दिया गया ।
4. खसरा नं. 21 निस्तार पत्रक में नाला दर्ज था। वर्तमान में यह एक व्यक्ति के नाम पर प्रदर्शित हो रहा है।
5./ खसरा नं. 20 शासकीय भूमि के रूप में सुरक्षित थी जिसमें आवंटित भूमि पट्टेदारो को मुआवजा प्रदान किया गया।
6 खसरा नं 30 में 9,950 है भूमि हुआ करती थी। वर्तमान में यह गायब है। इसी तरह खसरा नं. 29, 30 38 में भी हुआ है।
विगत 02 वर्ष पूर्व ग्रामवासियों ने तत्कालीन कलेक्टर को ज्ञापन दिया था जिसमे खसरा नं. 20 एवं 22 के लिए जांच आदेश हुआ पर जांच रिपोर्ट आज तक अप्राप्त रही, वर्तमान में भी खसरा नं. 20 एवं 22 में बड़े पैमाने पर मिसल से अधिक भूमि फौती नामांतरण से प्रविष्ट की जा रही है।
इस खसरे की रजिस्ट्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाये पटवारी हल्का पूर्व तहसील द्वारा वर्तमान तहसीलदार की संदिग्ध भूमिका की जांच हो। जांच दल बिलासपुर कलेक्टर कार्यालय द्वारा पृथक से बनाया जाये। निष्पक्ष जांच हो जिससे दरीघाट के नागरिकों के लिए दर्ज एवं सरकारी योजनाओं के लिए दर्ज सुरक्षित भूमि भू-माफिया की भेंट न चढ़ पाये।