
बिलासपुर । हर वर्ष ग्रीष्म ऋतु में होने वाले सोलापुरी माता पूजा उत्सव को लेकर शहर में श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह देखा जाता है। माँ सोलापुरी की पूजा अर्चना दक्षिण भारत के साथ पश्चिम बंगाल के खड़कपुर में हुआ करती थी।

आयोजन समिति के अध्यक्ष वी रामराव ने बताया कि खरगपुर से बिलासपुर पहुंचे कुछ दक्षिण भारतीयों के प्रयास से बिलासपुर में भी साल 2000 से यह उत्सव मनाया जा रहा है। इसका आरंभ भी श्री श्री सोलापुरी माता पूजा सेवा समिति द्वारा स्टेशन रोड, बंगला यार्ड , बारह खोली चौक पर किया गया था। इस वर्ष भी यहां भव्य पंडाल निर्मित कर मां सोलापुरी की पूजा अर्चना की जा रही है। इस उत्सव की विशेषता यह है कि यहां प्रतिदिन देवी के अलग-अलग स्वरूप की पूजा-अर्चना होती है और देवी की प्रतिमा का निर्माण भी प्रतिदिन पुजारी द्वारा किया जाता है ।

•भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की क्यों की जाती है एक साथ पूजा•
सोमवार को लक्ष्मी- गणेश स्वरूप की स्थापना की गई। खड़कपुर से पधारे पुजारी पार्थसारथी ने बाल पुजारियों और अपने सहयोगियों के साथ मिलकर लक्ष्मी- गणेश की स्थापना की । प्रथम आराध्य भगवान गणेश मां लक्ष्मी के दत्तक पुत्र माने जाते हैं । धार्मिक कथा अनुसार देवी लक्ष्मी को इस बात का अहंकार था कि संसार में हर ओर उनकी ही मांग है। उनके अहंकार पर प्रहार करते हुए श्री हरि विष्णु ने कहा कि जब तक कोई स्त्री माता नहीं बन जाती, तब तक वह पूर्ण नहीं होती। इससे देवी लक्ष्मी उदास हो रोने लगी और मां पार्वती के पास गई और उनसे एक पुत्र मांगा। मां पार्वती ने उन्हें अपना पुत्र गणेश दत्तक पुत्र के रूप में प्रदान किया , जिसके बाद मां लक्ष्मी ने भगवान गणेश को वरदान दिया कि जो भी मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की पूजा नहीं करेगा, उस पर मां लक्ष्मी की कृपा नहीं होगी। तभी से मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश की भी पूजा करने की परंपरा है। माँ लक्ष्मी सुख, संपत्ति, धनधान्य की देवी है।

•प्रतिदिन पहुंच रहे हैं हजारों श्रद्धालु•
शाम से ही यहां श्रद्धालुओं के पहुंचने का क्रम आरंभ हो जाता है। बिलासपुर के रेलवे क्षेत्र के अलावा, कासिम पारा, देवरीखुर्द, हेमू नगर , विद्या विनोबानगर और शहर के अलग-अलग क्षेत्रों से दर्शन के लिए श्रद्धालु पंडाल पहुंच रहे हैं। रात करीब 9:00 बजे तक पूरा पंडाल श्रद्धालुओं से खचाखच भर जाता है। सभी प्रतीक्षा करते हैं उस पल की जब पर्दा हटे और देवी के दर्शन हो।
सोमवार को पारंपरिक डफली की थाप और वैदिक मंत्रोचार के साथ पुजारी ने भगवान गणेश और देवी लक्ष्मी की पूजा अर्चना की। तत्पश्चात आरती की गई। समिति के सदस्यों के साथ विशिष्ट अतिथियों ने भी देवी की आराधना की। सोमवार को अतिथि के रूप में सेंट जेवियर स्कूल ग्रुप के एम डी जी एस पटनायक, शहर के जाने-माने चिकित्सक डॉ अभिराम शर्मा, पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच के अध्यक्ष और भाजपा नेता डॉ धर्मेंद्र दास एवं अमेटी यूनिवर्सिटी के डायरेक्टर पीआर डॉक्टर अरुण पटनायक शामिल रहे, जिनके द्वारा लकी ड्रॉ निकालकर विजेताओं को उपहार प्रदान किया गया।

•प्रतिदिन बनाया जाता है अलग-अलग प्रकार का भोग•
रामराव ने जानकारी देते हुए बताया कि परंपरा अनुसार श्री श्री सोलापुरी माता पूजा सेवा समिति द्वारा प्रतिदिन भक्तों में वितरण के लिए अलग-अलग प्रकार का प्रसाद भारी मात्रा में तैयार किया जाता है। इस काम के लिए खड़कपुर से विशेष रूप से बिलासपुर आए ब्रूसली उर्फ एन भास्कर के साथ उनके सहयोगी चंद्रशेखर, शिवा, जॉन मूर्ति ,अशोक आदि तरह तरह के व्यंजन बना रहे हैं। सोमवार को यहां खीर बनाया गया। विशेष बात यह है कि यह प्रसाद किसी भक्त के सौजन्य से प्रदान किया जाता है। सोमवार को पाटलिपुत्र संस्कृति विकास मंच के अध्यक्ष डॉ धर्मेंद्र दास द्वारा देवी को खीर प्रसाद अर्पण किया गया।
•यह रहे लकी ड्रॉ के विजेता•
आयोजन समिति द्वारा पंडाल पहुंचने वाले बच्चों और महिलाओं को निशुल्क लकी कूपन प्रदान किया जाता है जिसका ड्रॉ अतिथि निकालते हैं, बच्चों को पाठ्य पुस्तक सामग्री और महिलाओं को देवी को अर्पित साड़ी एवं चांदी का सिक्का उपहार स्वरूप प्रदान किया जा रहा है।
आयोजन समिति के अध्यक्ष वी रामराव ने बताया कि रविवार को भी श्री श्री सोलापुरी माता पूजा सेवा समिति द्वारा सैकड़ों की संख्या में निशुल्क कूपन वितरित किए गए। आयोजन के अतिथि रेल अधिकारी सीनियर डी ई ई रवि, विजय छूगानी, पंकज गुरबानी और सतीश शामनानी द्वारा लकी ड्रॉ निकाला गया। बच्चों के ग्रुप में रौनक, सरिता खैरवार और पी गणेश नायर के नाम का पर्चा निकला जिन्हें कॉपी पेन पेंसिल सेट प्रदान किया गया। 3 सौभाग्यशाली विजेता रानी नायक, मीना कुमारी और एस पी करुणा को उपहार स्वरूप चांदी का सिक्का मिला तो वही कुंती को चांदी फ्रेम जड़ित मां दुर्गा की मूर्ति भेंट की गई।
लकी ड्रा की विजेता आरती, पूजा और जौहरी साहू को देवी को अर्पित साड़ी भेंट किया गया। चांदी का सिक्का, चांदी का फोटो फ्रेम और बच्चों का कॉपी सेट बिल्डर कमलेश कश्यप द्वारा प्रदान किया गया, तो वही साड़ी तार बाहर डिपूपारा निवासी जी कांता रत्नम के सौजन्य से प्रदान किया गया।