
बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्मकुमारी ईश्वरी विश्विद्यालय, बिलासपुर द्वारा बहतराई इंडोर स्टेडियम में रविवार को आयोजित “खुशियों का पासवर्ड” कार्यक्रम में खुशियो का पासवर्ड बतलाते हुए ब्रम्हकुमारी शिवानी दीदी ने कहा कि ये मेरा शरीर मेरा है या मैं है। हर रोज अपने आप को याद दिलाना है कि मैं कौन हूं ! अलग अलग संस्कार से लोग अलग लगते है लेकिन वह आत्मा है जो आज इस शरीर में आए है वह पहले किसी और शरीर में था जिसकी वजह से इस शरीर के साथ अलग अलग संस्कार भी साथ आ गए है।

ये आत्मा है ये आज मेरे साथ है वह 100 साल पहले कोई अलग शरीर में अलग परिस्थितियो में था । जिससे वह अलग अलग स्वभाव लेकर मेरे घर आई है। इसलिए अपने बच्चो के अलग स्वभाव पर यह मत कहना कि ये बच्चा ऐसा क्यों है, ऐसा कभी नही कहना है ये अपनी जीवन यात्रा में कभी न कभी कुछ न कुछ संस्कार साथ ले कर आए है। इसलिए वे जैसे है उसे वैसी ही स्वीकार करे।

आत्मा को पहले हम समझते है, फिर स्वीकार करते है और अंत में दुआए देते है। दुआओं से आत्मा के स्वभाव को शक्तिशाली बनाकर परिवर्तित कर देता है।उन्होंने कहा कि हम खुशी बाहर ढूंढते है जो की हमारे अंदर है, खुशी का रिमोट कंट्रोल हमारे पास है लेकिन हम उसे बाहर ढूंढते है।
हम कहते है कि उसने हमारा मुड़ खराब किया, उसकि वजह से मन खराब हो गया। हमने अपने मन का रिमोट तो किसी और को दे दिया है। कोई दूसरा हमारे मुड को कैसे खराब कर सकता है। जब तक हम नही चाहेंगे। आज इसको पक्का करते है कि परिस्थितियों बाहर जैसा भी हो, रिश्ता बाहर जैसा भी हो , मुझ पर उनकी वजह से गुस्सा नही आयेगा। तो यह भाषा हमे बदलना पड़ेगा कि उसकी वजह से मैं गुस्सा हूं, उसकी वजह से मेरा मूड खराब है। अगर यह एक चीज को बदल ले तो हम हमेशा खुश रहेंगे। निगेटिव तरीके से दिया हुआ गिफ्ट से भी हमे खुशी नही मिल पाती। राय से ज्यादा राय देने का तरीका मायने रखता है। हमे किसी को राय नही देना है हमे लोगो को सही तरीके से चलने की शक्ति देना है।
कही भी कोई परिस्थिति आए कोई आपसे गलत व्यवहार करता है तो आज आपको एक संकल्प बोलना है यह उनका संस्कार है फिर उनको दुआए देना है। निगेटिव सच से आपके संस्कार की शक्ति घटती है।जब कोई निगेटिव बोलकर आपके मन को प्रहार करता है तो आपको उससे अधिक शक्तिशाली शस्त्र दुआ दे कर उसकी निगेटिव शक्ति पर प्रकार कर उनको नष्ट कर देना है। आपको कोई परेशानी है ,आपके शरीर में कोई बीमारी है, और कोई आपसे पूछे आप कैसे है तो आपको कभी अपनी परेशानी नही बोला है इससे निगेटिव एनर्जी को शक्ति मिलती है आपको अपने डॉक्टर को छोड़कर किसी को नही कहना है। जो आपकी प्रॉब्लम्स, आपकी बीमारी, आपकी मजबूरियों ठीक कर सकता है सर्फ उन्हे ही अपनी परेशानियों को बताना है, बाकी सभी को बोले सब बढ़िया है।
शिवानी दीदी ने लोगो से एक संकल्प करते हुए कहा कि संकल्प से सिद्धियां होती है। जिससे असंभव भी संभव हो जायेगा । आप अपनी आंखे बंद कर बोले कि मैं शांत हूं… मैं शक्तिशाली आत्मा हू…, मैं सदा शांत हूं स्थिर हूं… मैं हमेशा खुश हूं… निडर हूं ,… मैं निश्चिंत हूं मैं सफल हूं,… मेरा शरीर स्वस्थ निरोगी है, ..कर हमेशा रहेगा । मैं सबको स्वीकार करता हूं, सब मुझे स्वीकार करते है, मेरे रिश्ते, प्यार, सम्मान,विश्वास से मजबूत है, मेरा परिवार एकजुट है। सफलता मेरी निश्चित है, परमात्मा की दुआओं का सुरक्षा कवच मेरे चारो और है, मैं निर्भिग्न हूं।

उन्होंने कहा कि संकल्प में बहुत शक्ति है इसे मजबूत करने के लिए मेडिटेशन करे जो राजयोग के माध्यम से हमारे सेंटरो में सिखाया जाता है । आप सभी सेंटरो में जा कर इस राजयोग विद्या को जरूर सीखे।कार्यक्रम में लगभग 10 हजार लोगो की अपार भीड़ थी। जिन्होंने ब्रह्मकुमारी शिवानी दीदी की राजयोग विद्या को जाना और व्याख्यान का आनंद लिया ।
कार्यक्रम में शहर विधायक शैलेश पांडेय, पूर्व मंत्री अमर अग्रवाल ,बेलतरा विधायक रजनीश सिंह,पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बीके मंजू दीदी ने की।