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बिलासपुर

फाइनेंस कंपनी मैं कार्यरत मैनेजर को कंपनी के अधिकारियों ने मोहरा बनाकर फसाया, दो मासूम बच्चों और पत्नी को लेकर न्याय के लिए भटक रहा है बेरोजगार युवक

बिलासपुर। फाइनेंस कंपनी मैं कार्यरत मैनेजर को कंपनी के अधिकारियों ने ही मोहरा बनाकर फसाया । अब वह न्याय के लिए दर दर भटक रहा लेकिन उसे न्याय कही नहीं मिल रही है। थक हार कर वह आज मीडिया के समक्ष अपनी बात रखी। ताकि अधिकारियों तक उनकी बात पहुंच सके और उसे न्याय मिल सके।

उपेंद्र नाथ चंद्रा पिता भागवत प्रसाद चन्द्रा, उम्र 38 साल जो कि ग्राम कटौद, पोस्ट कांसा, तहसील डभरा जिला सक्ती (छ.ग.) का निवासी है,उन्होंने आज प्रेस वार्ता कर अपनी पीड़ा रखते हुए प्रशासन के समक्ष न्याय की गुहार लगाई ।

उन्होंने बताया कि सितम्बर 2021 से मई 2024 तक माईक्रो फायनेंस कंपनी ईसाफ स्वसार्या मल्टीस्टेट एग्रो कापरेटिव सोसायटी लिमिटेड ब्रांच सिमगा जिला बलौदा बाजार और ब्रांच गुंडरदेही जिला बालोद में कस्टमर सर्विस मैनेजर के पद पर कार्यरत था। उसके पूर्व वर्ष 2015 से जना स्माल फायनेंस बैंक रायगढ, दुर्ग, रायपुर, एस.व्ही. सी.एल. फायनेंस बिलासपुर, आई.डी.एफ.सी. फर्स्ट बैंक राजिम, अविरल फायनेंस बालोद में कार्यरत था एवं वर्ष 2024-25 में अविरल फायनेंस जैजैपुर में कार्यरत था। यह कि संस्था का रजिस्ट्रेशन ऐसाफ स्वसर्या मल्टी स्टेट को आपरेटिव क्रेडिट सोसाइटी लिमिटेड के नाम से पंजीकृत है। परन्तु यह ऐसाफ स्वसर्या मल्टी स्टेट एग्रो कोआपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के नाम से संचालित हो रही है।

उन्होंने कहा कि सहकारीता मंत्रालय और उससे सम्बंधित कार्यालय में इस संस्था से संबंधी शिकायत के बाद भी इन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है । इस कंपनी ने 150 से अधिक कर्मचारियों को फंसाया है। जिसमें एक मै भी शामिल हूं,वही दुर्ग के 10 कर्मचारी आज भी हिरासत में है।

उन्होंने कंपनी के कुछ लोगों पर आरोप लगाते हुए कहा कि ये लोग अपने फायदे के लिए पहले गलत लोन बाँट कर इसाफ बैंक का लाइसेंस लिए फ़िर मुझसे झूठा लोन का पेमेंट एंट्री कराकर ताकि वे अपना आईपीओ मार्केट में ला लाये। यह सब हो गया तो आज उस झूठे एंटी का पैसा मुझसे मांग रहे है।  अब तक मुझसे वे 7 लाख ले चुके है। और अभी भी मुझसे  2 लाख मांगा जा रहा है।

इस घटना के बाद मेरी नौकरी चली गई। कही कोई अन्य संस्था जॉब नहीं दे रहा। इन लोगों के कारण मै आज अपने दो छोटे बच्चो को कही पढ़ा भी नहीं पा रहा। आज मेरे पास आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है । न्याय के लिए हर जगह मैने गुहार लगाई लेकिन कही की न्याय नहीं मिल रहा है। थक हार कर आज मुझे न्याय के लिए मीडिया के समक्ष आना पड़ा।

उन्होंने मीडिया के माध्यम से सरकार से मांग किया है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी कर्मचारी पर अपराधिक मामला दर्ज किया जाय। साथ ही जब तक मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती तब तक सरकार की ओर से उन्हें आर्थिक मदद किया जाय। क्योंकि आज उसके पास अपने परिवार चलाने के लिए न पूंजी बची है न नौकरी।