Loading ...
बिलासपुर

मनरेगा कानून में बदलाव मजदूर विरोधी, गांधीजी के आदर्शों पर हमला – टी एस सिंहदेव

रायपुर। मोदी सरकार द्वारा मनरेगा कानून में किए गए हालिया बदलावों को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। विपक्षी दलों और मजदूर संगठनों का आरोप है कि यह फैसला न केवल श्रमिक विरोधी है, बल्कि महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज और काम की गरिमा के सिद्धांतों पर भी सीधा प्रहार है। कांग्रेस के पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सहदेव ने कांग्रेस भवन में एक प्रेसवार्ता कर बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए उक्त बात कही।

उन्होंने बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने “सुधार” के नाम पर लोकसभा में एक नया बिल पास कर दुनिया की सबसे बड़ी रोजगार गारंटी योजना मनरेगा को एक कंडीशनल और केंद्र-नियंत्रित स्कीम में बदल दिया है। पहले यह योजना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत अधिकार आधारित थी, लेकिन अब इसे सरकार की मर्जी पर निर्भर योजना बना दिया गया है।

प्रेसवार्ता


अधिकार से योजना में बदली मनरेगा


उन्होंने कहा कि अब तक मनरेगा के तहत मजदूरों को काम मांगने का कानूनी अधिकार था, लेकिन नए फ्रेमवर्क के तहत यह अधिकार समाप्त हो गया है। अब सरकार यह तय करेगी कि कब, कितने समय के लिए और किन परिस्थितियों में रोजगार दिया जाएगा।नए सिस्टम में हर साल एक तय अवधि के लिए रोजगार बंद करने की अनुमति होगी। इससे राज्य सरकारें यह तय कर सकेंगी कि गरीब कब काम करेंगे और कब बेरोजगार रहेंगे। फंड खत्म होने या फसल के मौसम में मजदूरों को महीनों तक काम से वंचित रखा जा सकता है।


फंडिंग पैटर्न में बड़ा बदलाव


श्री सिंहदेव ने कहा कि पहले मनरेगा में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत तक राशि देती थी, अब इसे बदलकर 60:40 कर दिया गया है। यानी राज्यों को 40 प्रतिशत खर्च उठाना होगा। साथ ही, पहले राज्यों को 50 प्रतिशत राशि जमा करनी होगी, तभी केंद्र फंड जारी करेगा।राज्यों की कमजोर वित्तीय स्थिति को देखते हुए विपक्ष का कहना है कि इससे आने वाले समय में मनरेगा धीरे-धीरे बंद हो जाएगी। मोदी सरकार राज्यों पर करीब 50,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ डालना चाहती है।


कोरोना काल में बनी थी गरीबों की लाइफलाइन


सिंहदेव ने कहा कि मनरेगा योजना दो दशकों से ग्रामीण गरीबों के लिए रोजगार का सहारा रही है। कोविड-19 महामारी के दौरान यह योजना आर्थिक सुरक्षा कवच साबित हुई थी। ऐसे समय में इसके अधिकारों को कमजोर करना गरीब विरोधी कदम माना जा रहा है।


100 दिन की गारंटी सिर्फ कागजों में


श्री सिंहदेव ने कहा सरकार द्वारा 100 से 125 दिन रोजगार देने के दावों को विपक्ष ने “चालाकी” बताया है। आरोप है कि छत्तीसगढ़ के 70 प्रतिशत गांवों में भाजपा सरकार आने के बाद अघोषित रूप से काम बंद कर दिया गया है।
पिछले 11 वर्षों में मनरेगा के तहत राष्ट्रीय औसत रोजगार सिर्फ 38 दिन रहा है। यानी मोदी सरकार किसी भी साल 100 दिन का काम देने में असफल रही है।


“V.B.G.RAM.G.” पर भी सवाल


उन्होंने कहा भाजपा द्वारा प्रचारित “V.B.G.RAM.G.” योजना को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। विपक्ष का कहना है कि इसमें भगवान राम से जुड़ा कुछ भी नहीं है। इसका फुल फॉर्म है –
विकसित भारत – गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)।
आरोप है कि राम के नाम पर जनता को गुमराह किया जा रहा है।


मजदूरों के अधिकारों पर कुठाराघात


उनका कहना है कि मनरेगा गांधीजी के ग्राम स्वराज, विकेंद्रीकरण और काम की गरिमा का जीवंत उदाहरण था। लेकिन सरकार ने न केवल गांधीजी का नाम हटाया, बल्कि करीब 12 करोड़ मजदूरों के अधिकारों को भी कमजोर कर दिया है।अब मनरेगा को एक प्रशासनिक मदद में बदल दिया गया है, जो पूरी तरह से केंद्र सरकार की मर्जी पर निर्भर होगी।