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बिलासपुर

लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन 93वें दिन भी जारी
अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा के जिलाध्यक्ष ने दिया समर्थन

बिलासपुर। लिंगियाडीह बचाओ धरना आंदोलन आज 93वें दिन भी जारी रहा। आंदोलन को उस समय नया संबल मिला जब अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रि महासभा के जिलाध्यक्ष राजीव रतन सिंह ‘रिक्की’ अपने समाज के लोगों के साथ धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन को अपना खुला समर्थन दिया।

जिलाध्यक्ष राजीव रतन सिंह ने धरनास्थल पर मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 93 दिनों से सैकड़ों गरीब परिवार अपने आशियाने को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन शासन-प्रशासन अब तक मौन है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर गरीबों के घर उजाड़ने की कोशिश की जा रही है, जबकि धरने पर बैठी महिलाओं और परिवारों की पीड़ा को नजरअंदाज किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि धूप और धूल में महिलाएं लगातार आंदोलन कर रही हैं, फिर भी उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन से संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रभावित परिवारों के हित में ठोस निर्णय लेने की मांग की।

धरना स्थल पर वार्ड पार्षद दिलीप पाटिल, रघु साहू सहित बड़ी संख्या में महिलाएं एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। यशोदा पाटिल, लता देवांगन, पुष्पा देवांगन, राजकुमारी देवांगन, साधना यादव, कल्पना यादव, सिद्धार्थ भारती, आदर्श सेवते, लखन कश्यप, लक्ष्मी लाल केवंट, पिंकी देवांगन, सोनिया निषाद, नंदकुमारी देवांगन, कुंती तिवारी, डॉ. रघु साहू, साखन दरवे, रामबाई, राधा साहू, संतोषी यादव, कुंती प्रजापति, चमेली रजक, जानकी गोड, फुलबाई साहू, उर्मिला, रूपा सरकार, सरस्वती देवांगन, मथुरा सूर्यवंशी, जमुना सूर्यवंशी, सनी अहिरवार, चंद्रमा अहिरवार, जयकुमार अहिरवार, नंदनी ध्रुव, परमिला ध्रुव, रानी देवांगन, चंद्रकली निषाद, सीता साहू, सुशीला साहू, सुवासिन साहू, अमेरिका श्रीवास, रूपा देवी, गायत्री देवांगन, मालती मानिकपुरी, मरजीना बेगम, वंदना डे, अनूपा श्रीवास, दुर्गा श्रीवास, सावित्री यादव, सुखमति मानिकपुरी, शिवकुमारी देवांगन, अर्पणा पटेल, हेमलता देवांगन, सरिता राजपूत, मालती यादव, संतोष सहित बड़ी संख्या में कुर्मी क्षत्रिय समाज के लोग मौजूद रहे।

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका धरना जारी रहेगा। 93 दिनों से जारी यह आंदोलन अब सामाजिक संगठनों के समर्थन के साथ और भी व्यापक रूप लेता दिखाई दे रहा है।