छत्तीसगढ़ शासन की कैबिनेट मीटिंग में आज प्रमुख फैसले के रूप में यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी,सर्व आदिवासी समाज ने जताई नाराजगी

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी अध्यक्षता में आज केबिनेट की मीटिंग हुई । जिसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए । जिसमें एक महत्वपूर्ण फैसला प्रदेश में यूजीसी लागू करने को लेकर ली गई। यदि यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC )अगर हमारे प्रदेश छत्तीसगढ़ में लागू होगा तो इस कानून के मुताबिक प्रदेश के सभी समुदाय एक कानून नियम के तहत संचालित होंगे।
क्या है समान नागरिक संहिता कानून? (What is the Uniform Civil Code?)
समान नागरिक संहिता एक सामाजिक मामलों से संबंधित कानून होता है जो सभी पंथ के लोगों के लिये विवाह, तलाक, भरण-पोषण, विरासत व बच्चा गोद लेने आदि में समान रूप से लागू होता है। दूसरे शब्दों में, अलग-अलग पंथों के लिये अलग-अलग सिविल कानून न होना ही ‘समान नागरिक संहिता’ की मूल भावना है। यह किसी भी पंथ जाति के सभी निजी कानूनों से ऊपर होता है।
आदिवासी समाज ने नाराजगी जताई
इस यूनिफार्म सिविल कोड का सर्व आदिवासी समाज युवा विंग के प्रदेश अध्यक्ष सुभाष परते ने गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने इस यूनिफार्म सिविल कोर्ट पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सर्व आदिवासी समाज इसका पुरजोर विरोध दर्ज करती।
हमने इसका पहले ही विरोध किया था। उसके बाद भी वर्तमान में राज्य शासन यहां लागू करने की तैयारी कर रही है। यहां के मूल निवासी आदिवासीयो की इससे उनकी विशिष्ट पहचान छीन जाएगी। रूढ़ि जन्य परंपरा के तहत संचालित रीति रिवाज जो सदियों से संचालित हैं जिसे संविधान में विधि का बल भी प्रदान किया गया है ।
उन्होंने आगे कहा कि क्या होगा पांचवी छठवीं अनुसूची एवं अनुच्छेद 13 (3 क) से संचालित आदिवासियों के पारंपरिक संवैधानिक अधिकारों को लेकर एक स्पष्ट गाइडलाइन शासन को बनाकर आदिवासी समुदाय को विश्वास में लेना पड़ेगा, नहीं तो इस कानून का पूरे आदिवासी समाज की तरफ से विरोध झेलना पड़ेगा।