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बिलासपुर

आध्यात्मिक चेतना से ही होगा श्रेष्ठ समाज का निर्माण : न्यायमूर्ति बी.डी. राठी
आत्मबल, पवित्रता और श्रेष्ठ संकल्पों से भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने का आह्वान

बिलासपुर। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, बिलासपुर के मुख्य सेवाकेंद्र राजयोग भवन में ब्रह्माकुमारीज के प्रशासनिक प्रभाग एवं समाज सेवा प्रभाग के संयुक्त तत्वावधान में इंदौर से प्रारंभ हुए “श्रेष्ठ समाज की स्थापना में आध्यात्मिकता का महत्व” अभियान का भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जबलपुर हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति बी.डी. राठी  ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि  कलेक्टर संजय अग्रवाल तथा विशिष्ट अतिथि प्रसिद्ध समाजसेवी एवं उद्योगपति  प्रवीण झा रहे।

कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक मूल्यों, नैतिकता, संस्कार, सकारात्मक सोच, आत्मबल एवं मानवता की भावना को जागृत करते हुए श्रेष्ठ समाज के निर्माण की दिशा में जन-जागरण करना था। अभियान दल इंदौर से विभिन्न स्थानों पर जनजागृति का संदेश देते हुए बिलासपुर पहुंचा, जहां राजयोग भवन में अभियान का समापन किया गया।

कार्यक्रम से पूर्व जन-जागरण रैली भी निकाली गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने सहभागिता कर श्रेष्ठ समाज निर्माण, आध्यात्मिकता एवं सकारात्मक जीवन का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभु स्मृति के साथ हुआ। इसके पश्चात अतिथियों का तिलक एवं पुष्पगुच्छ से आत्मीय स्वागत किया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम को औपचारिक शुभारंभ प्रदान किया गया।

राजयोग भवन की सेवाकेंद्र संचालिका बीके स्वाति दीदी ने सभी अतिथियों, अभियान दल एवं उपस्थित जनसमुदाय का शब्दों के माध्यम से हार्दिक स्वागत किया। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता केवल व्यक्तिगत शांति का विषय नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने की शक्ति है। जब व्यक्ति अपने विचारों, संस्कारों और व्यवहार में श्रेष्ठता लाता है, तभी श्रेष्ठ समाज की नींव मजबूत होती है।


अभियान के संयोजक ब्रह्माकुमार राकेश भाई ने अभियान के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज परिवर्तन की शुरुआत व्यक्ति के भीतर से होती है। व्यक्ति के विचार बदलेंगे तो उसका व्यवहार बदलेगा और व्यवहार बदलने से परिवार एवं समाज में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता व्यक्ति को आत्मबल प्रदान करने के साथ-साथ समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझने की प्रेरणा देती है।


प्रीति बहन ने जीवन में आध्यात्मिकता को अपनाने के विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि आध्यात्मिक जीवन का अर्थ संसार से अलग होना नहीं, बल्कि संसार में रहते हुए अपने मन, वचन और कर्म को श्रेष्ठ बनाना है। उन्होंने आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और परमात्म स्मृति को जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।


विशिष्ट अतिथि श्री प्रवीण झा ने कहा कि सेवा, आध्यात्मिकता, सकारात्मक सोच और मानवता के भाव से ही श्रेष्ठ समाज का निर्माण संभव है। उन्होंने कहा कि हम सभी अलग-अलग भूमिकाओं में हैं, लेकिन परमात्मा की संतान होने के नाते सभी समान हैं। हमें स्वयं को मालिक नहीं, बल्कि ईश्वर द्वारा सौंपे गए दायित्वों के सेवक के रूप में देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक संस्थाएं समाज के लिए सकारात्मक ऊर्जा, संस्कार और मूल्यों का संचार करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही हैं। आज की व्यस्त जीवनशैली में व्यक्ति को स्वयं को आध्यात्मिक रूप से मजबूत करने की आवश्यकता है। उन्होंने सकारात्मक संगति, मधुर वाणी और सेवा-भाव को जीवन का आधार बनाने का आह्वान किया।

मुख्य अतिथि कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि श्रेष्ठ समाज का निर्माण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था के प्रयास से नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति के सकारात्मक योगदान से संभव है। उन्होंने अभियान से जुड़े सभी सदस्यों का बिलासपुर आगमन पर स्वागत करते हुए कहा कि यह अभियान समाज को जागृत करने और बेहतर समाज के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

उन्होंने कहा कि समाज परिवारों और व्यक्तियों से मिलकर बनता है। यदि व्यक्ति आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ा होगा तो उसका परिवार भी सुखी और सुंदर बनेगा। आध्यात्मिकता का वास्तविक अर्थ यह है कि हमारे मन, वचन और कर्म ऐसे हों, जिनसे किसी दूसरे व्यक्ति को पीड़ा न पहुंचे। उन्होंने बच्चों में बचपन से अच्छे संस्कार विकसित करने पर बल देते हुए कहा कि बच्चे केवल हमारी बातों से नहीं, बल्कि हमारे आचरण से अधिक सीखते हैं।

श्री अग्रवाल ने कहा कि श्रेष्ठ समाज की शुरुआत घर, परिवार और अपने मोहल्ले से होती है। समाज में नकारात्मक गतिविधियों को देखकर अच्छे लोगों को केवल दर्शक नहीं बने रहना चाहिए, बल्कि सकारात्मक रूप से अच्छाई को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने आध्यात्मिकता को मानवता एवं सेवा से जोड़ते हुए कहा कि ज्ञान तभी सार्थक है जब उससे विनम्रता आए और धन तभी सार्थक है जब उसका उपयोग मानव सेवा एवं समाज कल्याण में हो। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं आध्यात्मिक कार्यों की सराहना की।

इस अवसर पर तालापारा सेवाकेंद्र की संचालिका ब्रह्माकुमारी रमा बहन ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में धारण करने तथा समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई।

अध्यक्षीय उद्बोधन में जबलपुर उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायमूर्ति बी.डी. राठी ने कहा कि भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिए केवल आर्थिक या भौतिक विकास पर्याप्त नहीं है। समाज में आत्मबल, पवित्रता, सत्यता, मधुरता, प्रेम, ईमानदारी और श्रेष्ठ संकल्पों की स्थापना आवश्यक है। यही मूल्य श्रेष्ठ समाज की आधारशिला हैं।


उन्होंने युवाओं में आत्मविश्वास और आत्मबल को मजबूत करने की आवश्यकता बताते हुए महामना मदन मोहन मालवीय एवं स्वामी विवेकानंद के जीवन प्रसंगों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दृढ़ मनोबल, विवेक और सकारात्मक संकल्प व्यक्ति को असंभव दिखाई देने वाले कार्यों को भी संभव करने की शक्ति देते हैं। महात्मा गांधी के जीवन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि बड़े सामाजिक एवं राष्ट्रीय अभियानों की सफलता के पीछे पवित्रता, त्याग और दृढ़ संकल्प जैसी शक्तियां महत्वपूर्ण होती हैं।


न्यायमूर्ति राठी ने ब्रह्माकुमारीज संस्था की सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि संस्था के भाई-बहन पवित्रता, त्याग, तपस्या और राजयोग के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने नशामुक्ति जैसे अभियानों को श्रेष्ठ समाज की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि केवल श्रेष्ठ विचारों को सुनना पर्याप्त नहीं है, उन्हें जीवन में व्यवहार के रूप में उतारना आवश्यक है। इसके लिए व्यक्ति को सबसे पहले यह समझना होगा कि “मैं कौन हूं?” आत्म-परिचय और परमात्म-परिचय से ही आत्मबल एवं वास्तविक परिवर्तन संभव है।


समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय सेवा एवं सकारात्मक योगदान देने वाले समाजसेवियों एवं विशिष्ट व्यक्तियों का प्रशस्ति पत्र एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मान किया गया। इस सम्मान के माध्यम से समाज सेवा में सक्रिय व्यक्तियों के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया तथा उपस्थित लोगों को भी सेवा एवं सामाजिक दायित्वों के प्रति प्रेरित किया गया।

कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली मंच संचालन बीके संतोषी दीदी ने एवं आभार प्रदर्शन डॉ कमल छाबड़ा ने किया। समारोह के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि व्यक्ति के भीतर आत्मबल, पवित्रता, श्रेष्ठ संस्कार और सेवा-भाव का विकास ही परिवार, समाज और राष्ट्र को श्रेष्ठ बनाने का आधार है। आध्यात्मिकता को जीवन में उतारकर ही एक शांतिपूर्ण, संस्कारित, सकारात्मक और मानवतापूर्ण समाज की स्थापना की जा सकती है।