बिलासपुर टैक्स बार एसोसिएशन चुनाव को लेकर बड़ा विवाद: सुरेश शुक्ला ने प्रक्रिया को बताया ‘अवैध’ और ‘अलोकतांत्रिक’ . देखिए वीडियो…
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ टैक्स बार एसोसिएशन के चुनावों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जीएसटी बार एसोसिएशन बिलासपुर के अध्यक्ष सुरेश शुक्ला ने वर्तमान चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे पूरी तरह से अलोकतांत्रिक करार दिया है।
सुरेश शुक्ला का कहना है कि एसोसिएशन में पिछले कई वर्षों से गुप्त मतदान (Secret Ballot) के जरिए चुनाव कराने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार चुनाव अधिकारियों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर ‘हाथ उठवाकर’ मतदान कराया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से असंवैधानिक है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह पूरी कवायद किसी एक विशेष व्यक्ति को फायदा पहुंचाने और उसे जिताने के उद्देश्य से की जा रही है।
शुक्ला ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा, “हम सुबह 8:00 बजे से लेकर रात के 8:00 बजे तक (लगभग 12 घंटे) यहां बैठे रहे, जिसके बाद चुनाव अधिकारियों द्वारा इस दोषपूर्ण प्रक्रिया को लागू कर दिया गया। यह वकीलों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स (CA) और टैक्स सलाहकारों का एक प्रतिष्ठित और जिम्मेदार समूह है, कोई स्कूल नहीं है जहां चॉकलेट बांटने के लिए हाथ उठवाए जा रहे हों। चुनाव अधिकारियों ने इस पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था का मज़ाक बना कर रख दिया है।”
उन्होंने आगे बताया कि जीएसटी बार एसोसिएशन बिलासपुर के पांच पदाधिकारी और करीब 80 सदस्य अपनी रोजी-रोटी और काम छोड़कर सुबह से इस चुनाव में हिस्सा लेने आए थे। जब इस प्रक्रिया का विरोध किया गया, तो चुनाव अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह उनके क्षेत्राधिकार में आता है। सुरेश शुक्ला ने स्पष्ट किया कि क्षेत्राधिकार किसी की तानाशाही के लिए नहीं होता। वे इस चुनाव प्रक्रिया के खिलाफ न्यायालय (कोर्ट) का दरवाजा खटखटाएंगे और इसे अवैध घोषित कराने का प्रयास करेंगे।
जांजगीर-चांपा बार एसोसिएशन ने भी किया विरोध
इस मामले में बिलासपुर ही नहीं, बल्कि जांजगीर-चांपा और सकती जिले के टैक्स बार एसोसिएशन ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। वहां के अध्यक्ष ऋषि कुमार अग्रवाल ने इस घटनाक्रम को बेहद निंदनीय और चिंताजनक बताया।
ऋषि कुमार अग्रवाल ने कहा, “हमारा समाज कानून और नियमों से चलने वाला समाज है। हम जिस क्षेत्र से आते हैं, वह कानून के जानकारों का गढ़ है। ऐसे में इस प्रकार की मनमानी प्रक्रिया देखना बेहद आश्चर्यजनक और दुखद है। यह प्रथा हमारी आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश देगी? यह कतई स्वीकार्य नहीं है और हम सब मिलकर इसका पुरजोर विरोध करते हैं।”
इस विवाद के बाद अब यह मामला अदालत में जाने की पूरी संभावना है, जिससे टैक्स बार एसोसिएशन के चुनावों पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।