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शिक्षा की गुणवत्ता और समानता के लिए युक्तियुक्तकरण महत्वपूर्ण कदम : कलेक्टर : संजय अग्रवाल

बिलासपुर। युक्तियुक्तकरण को लेकर जिले के कलेक्टर संजय अग्रवाल ने आज जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में प्रेस वार्ता की। उन्होंने युक्तियुक्तकरण का औचित्य बताया। कलेक्टर ने कहा कि जिले में अब एक भी स्कूल शिक्षक विहीन अथवा एकल शिक्षकीय नहीं रहे। शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और समावेशी बनाने के लिए शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। नगरीय इलाकों में छात्रों की तुलना अधिक शिक्षक पदस्थ हैं, जबकि ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों की शालाओं में स्थिति इसके विपरीत है। वहां शिक्षकों की कमी है, जिसके चलते शैक्षिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और छात्र-छात्राओं का परीक्षा परिणाम भी प्रभावित हो रहा है। इस स्थिति को सुधारने के उद्देश्य ही प्रदेश सरकार द्वारा युक्तियुक्तकरण का कदम उठाया गया है। इससे जिन शालाओं में शिक्षक की जरूरत है, वहां शिक्षक उपलब्ध होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में गणित, रसायन, भौतिकी और जीव विज्ञान जैसे विषयों के विषय-विशेषज्ञ उपलब्ध होंगे। बच्चों को अच्छी शिक्षा, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। कुल मिलाकर युक्तियुक्तकरण के माध्यम से छात्र-शिक्षक अनुपात स्कूलों में संतुलित हो, यह सुनिश्चित किया जा रहा है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शिक्षकों और शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। छ.ग. में प्राथमिक स्तर पर छात्र-शिक्षक अनुपात 21.84 बच्चे प्रति शिक्षक एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं में 26.2 बच्चे प्रति शिक्षक हैं, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर है।राज्य में 212 प्राथमिक शालाएं शिक्षकविहीन एवं 6,872 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं।

हमारे जिले में 04 प्राथमिक शालाएं शिक्षक विहीन एवं 126 शालाएं एकल शिक्षकीय हैं। राज्य में 48 पूर्व माध्यमिक शालाएं शिक्षकविहीन और 255 एकल शिक्षकी थे। हमारे जिले में 00 पूर्व माध्यमिक शाला शिक्षकविहीन और 04 एकल शिक्षकीय थे। राज्य के प्राथमिक स्कूलों में 7,296 शिक्षक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 5,536 शिक्षकों की आवश्यकता है। हमारे जिले में प्राथमिक स्कूलों में 1608 सहायक शिक्षक और पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में 230 शिक्षकों की आवश्यकता है।

राज्य के प्राथमिक शालाओं में 3,608 एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं में 1,762 शिक्षक ही अतिशेष हैं। हमारे जिले में प्राथमिक शालाओं में 457 एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं में 211 शिक्षक ही अतिशेष थे। जिनका काउसिंलिग कर कम शिक्षक एवं अधिक दर्ज संख्या वाले शालाओं में समायोजन किया गया है।

बिलासपुर जिले की स्थिति

बिलासपुर जिले के कोटा के खपराखेल कुसुमखेड़ा मस्तूरी के सबरियाडेरा लोहर्सी एवं तखतपुर के डिलवापारा आदिवासी बैगा बाहुल्य ग्राम है। जो शिक्षकविहीन थे, यहाँ 02-02 शिक्षक दिये गये है।

इसी प्रकार एकल शिक्षकीय पूर्व माध्यमिक शाला चितवार (तखतपुर), जैतपुर (मस्तूरी), तरवा व नगोई (कोटा) में 03-03 शिक्षक, शिक्षकविहीन शाला शास. हाईस्कूल कुकुदा (मस्तूरी) में 05, सैदा (तखतपुर) में 04. कुकुर्दीकला (मस्तूरी) में 03 शिक्षक दिये गये है। शहर के भीतर पूर्व माध्यमिक शाला तारबहार (बिल्हा) में 11 शिक्षक पदस्थ थें, किन्तु दर्ज संख्या मात्र 142 है। ऐसे अतिशेष शिक्षकों को अन्यत्र शालाओं पदस्थापना दी गई है।

शिक्षा की गुणवत्ता और समानता की दिशा में बड़ा कदम

युक्तियुक्तकरण से शिक्षक विहीन विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता के साथ ही एक ही परिसर में विद्यालय होने से आधारभूत संरचना मजबूत होगी और स्थापना व्यय में भी कमी आएगी। यह युक्तियुक्तकरण कोई कटौती नहीं, बल्कि गुणवत्ता और समानता की दिशा में बड़ा कदम है। जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई प्रभावित न हो।

इस प्रेसवार्ता के दौरान नगर निगम आयुक्त अमित कुमार, संयुक्त संचालक शिक्षा आरएन आदित्य, डीईओ अनिल तिवारी सहित बड़ी संख्या में प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और वेब पोर्टल से जुड़े मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित थे। कलेक्टर ने उनके द्वारा किए गए सवालों का भी जवाब दिया।