गली-मोहल्लों में कुकुरमुत्ते की तरह चल रहीं अवैध क्लीनिकें, कुंभकर्णी नींद में सोया स्वास्थ्य अमला
बिलासपुर । प्रदेशभर में आए दिन झोलाछाप डॉक्टरों के गलत इलाज और लापरवाही से बेकसूर लोगों की जान जाने की खबरें आ रही हैं। न्यायधानी बिलासपुर और इसके आसपास के ग्रामीण अंचलों में भी इन कथित फर्जी डॉक्टरों के इलाज से कई मासूमों और महिलाओं की असमय मौत हो चुकी है। बावजूद इसके, शहर से लेकर गांव-गांव की हर गली-मोहल्ले में झोलाछाप डॉक्टरों की अवैध क्लीनिक धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। ये अनपढ़ और फर्जी डॉक्टर गरीब व असहाय लोगों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ कर रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विभाग आंखें मूंदकर मौतों का इंतजार कर रहा है
प्रमुख घटनाएं जो बनीं मासूमों व मरीजों की मौत का कारण:
अगस्त 2024 में रतनपुर थाना क्षेत्र के ग्राम कलमीटार में सर्दी-खांसी का इलाज कराने पहुंची 35 वर्षीय महिला रेखा बिंझवार की एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा दिए गए संदिग्ध इंजेक्शन के बाद खून की उल्टी होने से दर्दनाक मौत हो गई थी।
जुलाई/अगस्त 2024 में कोटा ब्लाक में फैले जल जनित और मलेरिया के पीड़ित मरीजों का झोलाछाप डॉक्टरों के इलाज से मौत हुई। जिसके बाद कलेक्टर अवनीश शरण के निर्देश पर क्षेत्र के अवैध क्लीनिकों को सील कर बंद करवाया गया था।

बिलासपुर जिले के अंतर्गत कोटा ब्लॉक के ग्राम खैरा में 17 अगस्त 2024 को सर्दी-बुखार से पीड़ित कुमार अरबो (40 वर्ष) की मौत झोलाछाप डॉक्टर कुमार सिंह राजपूत द्वारा घर पर दिए गए इंजेक्शन जिसके बाद उसकी मौत हो गई थी।

ग्राम सेमरताल निवासी दयालदास खरे (48) जो कि सत्या पावर प्लांट में काम करता था। वह 6 जुलाई को प्लांट से लौटा तो उसकी तबीयत बिगड़ गई और बुखार आ गया। इस पर परिजन उसे गांव के ही कथित डॉक्टर जय भारद्वाज को दिखाने के लिए ले गए। जांच में पाया गया कि झोलाछाप डॉक्टर के गलत इंजेक्शन लगाने से उसकी मौत हुई।

17 जुलाई 2024 को ग्राम करवा निवासी प्रार्थी जब्बार अली ने बेलगहना चौकी में शिकायत दर्ज कराई कि टेंगनमाडा के झोलाछाप डॉक्टर दीपक गुप्ता उर्फ चिंटू गुप्ता के गलत इलाज के कारण उनके दो बेटों, इरफान अली (13) और इरमान अली (14) की मृत्यु हो गई।
कोनी क्षेत्र के सेमरताल में गलत इलाज और तेज बुखार के दौरान झोलाछाप डॉक्टरों की लापरवाही से मरीजों की मौत के मामले सामने आए थे।
कब जागेगा प्रशासन?
ग्रामीण क्षेत्रों में योग्य डॉक्टरों और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का फायदा उठाकर ये झोलाछाप डॉक्टर अपने पैर पसार चुके हैं। मरीजों को तुरंत राहत देने के नाम पर ये हैवी एंटीबायोटिक्स और बिना जांच के हाई-डोज इंजेक्शन लगा देते हैं, जिससे मरीज की हालत बिगड़ने पर जान बचाना मुश्किल हो जाता है।
जनता की मांग: विशेष अभियान चलाकर हो सख्त कार्रवाई
शासन-प्रशासन से मांग की जा रही है कि स्वास्थ्य विभाग एक विशेष अभियान चलाकर गली-गली कुकुरमुत्ते की तरह खुल रही इन अवैध क्लीनिकों को स्थायी रूप से बंद कराए और फर्जी डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करे, ताकि गरीब व अनपढ़ ग्रामीण इनके झांसे में आकर अपनी जान से हाथ न धो बैठें।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग केवल कोई बड़ी घटना होने पर ही जागता है और महज खानापूर्ति की कार्रवाई कर मामला ठंडे बस्ते में डाल देता है।