यूथ कांग्रेस चुनाव से पहले गुटीय समीकरण साधने की कवायद, रंजेश सिंह को मिली NSUI ग्रामीण अध्यक्ष की जिम्मेदारी

बिलासपुर। यूथ कांग्रेस के आगामी चुनाव से पहले बिलासपुर कांग्रेस में गुटीय समीकरणों को साधने की कवायद तेज हो गई है। इसी कड़ी में एनएसयूआई के जिला संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए प्रदेश सचिव रहे रंजेश सिंह को एनएसयूआई ग्रामीण जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। संगठन में हुए इस फेरबदल को आगामी यूथ कांग्रेस चुनाव की तैयारियों और कांग्रेस के भीतर चल रही गुटीय राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
दरअसल, आगामी दिनों में होने वाला यूथ कांग्रेस चुनाव अब महज संगठनात्मक चुनाव तक सीमित नजर नहीं आ रहा है। बिलासपुर में यह चुनाव कांग्रेस के दो प्रभावशाली राजनीतिक खेमों के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का खेमा है, तो दूसरी ओर देवेंद्र यादव के समर्थक सक्रिय हैं।
बताया जा रहा है कि चुनाव से पहले देवेंद्र यादव खेमे ने संगठन में दोनों पक्षों के बीच संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है। इसी रणनीति के तहत जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री खेमे से जुड़े रंजेश सिंह को एनएसयूआई ग्रामीण जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं शहर कांग्रेस अध्यक्ष सुधांशु मिश्रा खेमे से जुड़े अजय यादव को यूथ कांग्रेस ग्रामीण पद के लिए उम्मीदवार बनाकर समर्थन दिए जाने की चर्चा है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो दोनों खेमों को साधने की यह कवायद यूथ कांग्रेस चुनाव में संगठन के भीतर व्यापक समर्थन जुटाने की रणनीति का हिस्सा हो सकती है। एक तरफ ग्रामीण कांग्रेस के प्रभावशाली खेमे को प्रतिनिधित्व दिया गया है, वहीं दूसरी तरफ शहर संगठन से जुड़े चेहरे को मैदान में उतारकर समीकरणों को संतुलित करने का प्रयास दिखाई दे रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि गुटीय संतुलन की यह रणनीति देवेंद्र यादव खेमे के लिए कितनी कारगर साबित होती है। क्या दोनों खेमों को साथ साधने की कोशिश यूथ कांग्रेस चुनाव में उनके प्रत्याशियों की राह आसान करेगी या फिर भूपेश बघेल समर्थक खेमा अंतिम समय में बाजी पलटने में सफल रहेगा?
फिलहाल बिलासपुर कांग्रेस की राजनीति में यूथ कांग्रेस चुनाव को लेकर अंदरखाने हलचल तेज है। मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में देवेंद्र यादव खेमा अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में नजर आ रहा है, जबकि भूपेश बघेल खेमे की सक्रियता और चुनावी रणनीति पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।