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बिलासपुर

अमन और शांति के शहर बिलासपुर में किसने बोया नफरत का बीज? दो गुटों की आपसी लड़ाई को सांप्रदायिक रंग देने की साजिश नाकाम


बिलासपुर। अपनी गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी सौहार्द के लिए पहचाना जाने वाला बिलासपुर शहर, जहां बरसों से हिंदू-मुस्लिम समुदाय के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते आए हैं, हाल ही में एक अप्रिय घटना का गवाह बना। रक्षाबंधन की रात दो पक्षों के बीच हुई एक निजी लड़ाई को कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर दो धर्मों के बीच का विवाद बनाने की नाकाम कोशिश की।

सुबह जब यह खबर शहर में फैली, तो आम नागरिक स्तब्ध रह गए। हालांकि, इस घटना के पीछे की सच्चाई कुछ और ही है। जिस मोहल्ले में यह बवाल हुआ, वहां हिंदू परिवार पूरी तरह सुरक्षित रहे और इसी तरह हिंदू-बहुल इलाकों में मुस्लिम समुदाय के लोग बिना किसी डर के शांति से रहे। इससे यह साफ उजागर होता है कि यह कोई सांप्रदायिक तनाव नहीं, बल्कि दो व्यक्तिगत गुटों की आपसी रंजिश थी।

अपनी व्यक्तिगत लड़ाई में अन्य लोगों का समर्थन जुटाने के लिए कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर इसे धार्मिक मोड़ देने का स्वांग रचा। इस पूरी घटना के दौरान न तो किसी हिंदू ने मुस्लिम धर्म के खिलाफ कोई टिप्पणी की और न ही किसी मुस्लिम ने हिंदू धर्म के विरुद्ध कुछ कहा।

मामले की जानकारी मिलते ही शहर के बुद्धिजीवियों ने इस साजिश पर चिंता जताई और पुलिस प्रशासन के त्वरित कदम की सराहना की। बिलासपुर पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम में जिस संयम, समझदारी और मुस्तैदी से स्थिति को संभाला, उसकी हर तरफ तारीफ हो रही है।

पुलिस और प्रबुद्ध वर्ग की अपील:

शहर के समझदार नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों और नफरत फैलाने वाले लोगों के झांसे में न आएं। बिलासपुर की जनता से उम्मीद की जा रही है कि वे इस संवेदनशील समय में शांति बनाए रखेंगे और शहर के भाईचारे को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस व प्रशासन का पूर्ण सहयोग करेंगे।