
बिलासपुर। अभी तक आप सभी ने हनुमान जी को कई अलग अलग रूपो में देखा होगा कही खड़े हुए तो कही बैठे हुए तो कही बाल रूप में पर क्या कभी आपने हनुमान जी को स्त्री रूप में देखा है ? नहीं न!!
चलिए ..! आज हम आपको मिलवाने जा रहे है ऐसे हनुमान जी से जो स्त्री रूप में विराजमान है।

बिलासपुर शहर से करीब 25 किमी दूर रतनपुर में गिरजाबंध नामक स्थित है, जहां यह मंदिर है, जहां हनुमान जी पुरुष नहीं बल्कि स्त्री के रूप में विराजमान है। इस मंदिर में हनुमान जी की स्त्री रूप में पूजा की जाती है। यहां हनुमान जी को चोला नहीं बल्कि मूर्ति का श्रृंगार महिलाओं की तरह किया जाता है और जेवर पहनाए जाते हैं।
हनुमान जी की यह प्रतिमा 10 वीं शताब्दी पुरानी है। कहा जाता है कि मंदिर का निर्माण रतनपुर के तत्कालीन राजा पृथ्वी देवजू ने कराया था। वे हनुमान जी के परम भक्त थे। एक बार उन्हें कुष्ठ रोग हो गया था। तब एक रात उनके सपने में हनुमान जी आए और उन्हें मंदिर बनाने का आदेश दिया। जब मंदिर का काम पूरा होने वाला था, तब राजा के सपने में फिर हनुमान जी आए उन्हें महामाया कुंड से मूर्ति निकाल कर मंदिर में स्थापित करने को कहा जब कुंड से मूर्ति निकाली गई तो हनुमान जी की मूर्ति को स्त्री रूप में पाई गई ।
अहिरावण के वध के लिए हनुमान जी ने लिया था स्त्री रूप
मंदिर में नारी स्वरूप प्रतिमा के बाएं कंधे पर श्रीराम और दाएं कंधे पर लक्ष्मण विराजमान हैं। हनुमान के पैरों के नीचे 2 राक्षस हैं, जिसमें से एक बलि देने वाले कसाई और दूसरा अहिरावण की मूर्ति है। इसमें पाताल लोक का चित्रण भी है। मूर्ति में रावण के भाई अहिरावण का संहार करते हुए दर्शाया गया है। मान्यता है कि अहिरावण के वध के लिए हनुमान जी ने स्त्री रूप धारण किया था।
मूर्ति की यह कहानी
मंदिर के महंत तारकेश्वर पुरी बताते हैं कि जब अहिरावण, श्रीराम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गए थे और उनकी जब बलि दे रहे थे, तो अहिरावण की इष्ट देवी के स्थान पर हनुमान जी स्वयं रहते हैं। बलि देने से पहले ही देवी रूपी हनुमान जी अहिरावण की भुजा उखाड़ दी और दोनों को पाताल लोक से मुक्त कराया। उसी देवी स्वरूप में गिरजाबंध में आज भी हनुमान जी की मूर्ति स्थापित है, जिसकी पूजा की जाती है।