बिलासपुर में अवैध क्लीनिकों का जाल! बिना डिग्री के झोलाछाप कर रहे मरीजों का इलाज, प्रशासन खामोश, शिकायत के 4 महीने बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई
बिलासपुर। जिले में जान से खिलवाड़ करने वाले अवैध झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई कर रहा है। RTI कार्यकर्ता ललित गोपाल द्वारा 6 अप्रैल 2026 को कलेक्टर और सीएमएचओ को दी गई शिकायत पर अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
क्या है मामला?
ललित गोपाल ने RTI के तहत शिकायत की थी कि बिलासपुर जिले में बिना डिग्री के झोलाछाप डॉक्टर मरीजों का इलाज कर रहे हैं। ये लोग बिना अनुमति के क्लीनिक चला रहे हैं और जानलेवा दवाइयां दे रहे हैं।
शिकायत में 5 जगहों का जिक्र किया गया:
1. डॉ.मंटू बाघ – देवरीखुर्द चौक – हनुमान मंदिर के समीप
2. जायसवाल क्लीनिक – चंद्रशेखर आजाद नगर, देवरीखुर्द मेन रोड, देवरीखुर्द
3. डॉ मुकुल दास – ग्राम दोमुहानी, मस्तूरी ब्लॉक
4. डॉ विधान चक्रवर्ती – हटरी चौक, चकरभाठा, बिलासपुर
5. डॉ साहू – साहू मेडिकल,शंकर नगर चौक – गणेश नगर गेट, रेलवे क्षेत्र
शिकायतकर्ता ने मांग की थी कि इन अवैध क्लीनिकों की जांच कर तुरंत कार्रवाई हो और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का ढुलमुल रवैया: “जांच जारी है”
1. कलेक्टर कार्यालय ने 16.07.2026 को पत्र लिखकर मामले को सीएमएचओ को भेजा।
2. सीएमएचओ कार्यालय ने 03.08.2026 को कहा कि “झोलाछाप डॉक्टरों के विरुद्ध कार्रवाई करने हेतु खण्ड चिकित्सा अधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है”।
3. RTI में मांगी गई जानकारी – किस अधिकारी को जांच दी गई, कितनी क्लीनिक की जाँच की गई, और कितनें अवैध रूप से संचालित क्लिनिक पर सील बंद कार्यवाही हुई, कितनों पर FIR हुई – इस पर आज तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
शिकायतकर्ता ने 24.06.2026 को फिर RTI लगाकर पूछा कि 06.04.2026 की शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई। जवाब में सिर्फ “पत्राचार किया गया” बताया गया।
खतरे में जनता की जान
RTI दस्तावेजों से साफ है कि 4 महीने बीत जाने के बाद भी बिलासपुर में अवैध क्लीनिक धड़ल्ले से चल रहे हैं। बिना डिग्री वाले लोग मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग सिर्फ “पत्र लिखने” तक सीमित है।
सवाल ये है:
जब प्रशासन को 5 अवैध क्लीनिकों के नाम-पते पहले से पता हैं, तो कार्रवाई में देरी क्यों? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?
सीएमएचओ और कलेक्टर से जवाब मांगा गया है। यदि 15 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में शिकायत की जाएगी।