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बिलासपुर

वीडियो। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं का एक दिवसीय धरना प्रदर्शन: नियमितीकरण और 30,000 रुपये मानदेय की उठाई मांग

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने अपनी वर्षों पुरानी लंबित मांगों को लेकर आज एक दिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े तथा विभागीय सचिव के नाम (कलेक्टर/अनुविभागीय अधिकारी के माध्यम से) ज्ञापन सौंपा।

बिलासपुर के कोहेर गार्डन में आज सुबह से ही जिले भर से सैकड़ो की संख्या में आई आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं एकत्रित हुए और अपनी पांच सूत्रीय मांगों को लेकर जमकर नारे बाजी की।

धरना स्थल पर उपस्थित महिला कर्मचारियों ने बताया कि देश की आजादी के 75 वर्षों के बाद भी उन्हें मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। दिन-प्रतिदिन बढ़ती महंगाई के कारण आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि विभागीय दायित्वों के अलावा उनसे अन्य सरकारी कार्य भी लिए जाते हैं, जिससे मुख्य विभागीय काम प्रभावित होता है।

आंगनबाड़ी संघ की प्रमुख मांगें:

  नियमितीकरण एवं न्यूनतम मानदेय: आंगनबाड़ी कर्मियों को तुरंत नियमित किया जाए। नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी होने तक श्रम कानून के तहत कार्यकर्ता को ₹30,000 तथा सहायिका को ₹25,500 प्रतिमाह मानदेय दिया जाए।

बिना उम्र सीमा के पदोन्नति: कार्यकर्ताओं को सुपरवाइजर पद पर और सहायिकाओं को कार्यकर्ता पद पर सीधे पदोन्नत किया जाए, जिसमें उम्र का बंधन समाप्त किया जाए।

सामाजिक सुरक्षा लाभ: सभी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को समूह बीमा, पेंशन, ग्रैच्युटी और ईपीएफ (PF) की सुविधा दी जाए।

*अनुकंपा नियुक्ति एवं सेवानिवृत्ति लाभ: सेवाकाल के दौरान अकस्मात मृत्यु होने पर आश्रितों को तत्काल अनुकंपा नियुक्ति मिले। सेवानिवृत्ति पर कार्यकर्ता को ₹5 लाख एवं सहायिका को ₹3 लाख का एकमुश्त भुगतान किया जाए।

वार्षिक मानदेय वृद्धि: मध्य प्रदेश की तर्ज़ पर छत्तीसगढ़ में भी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में प्रतिवर्ष ₹1,000 की वृद्धि लागू की जाए।

संगठन की जिलाध्यक्ष भारती मिश्रा ने कहा कि उन लोगों यह मांगे वर्षों पुरानी है । सरकार द्वारा हर बार आश्वासन देकर उनका यह आंदोलन खत्म करा दिया जाता है लेकिन इस महगाई के दौर में इतने कम मानदेय में महिलाओं का घर चलाना और बच्चों का लालन पालन करना मुश्किल हो रहा है।  सरकार को मानवता पूर्वक हमारी इन मांगो को तत्काल मान लेना चाहिए।

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन द्वारा उनकी जायज मांगों का शीघ्र निराकरण नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन और अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए विवश होंगी।