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•युवा शक्ति कार्यक्रम में युवाओं को संबोधित किया बॉलीवुड एक्टर आशुतोष राणा •गुरु आपको कड़क नही करते गुरु आपको करेक्ट करते है : आशुतोष राणा • जनता हमे राजनीति में लाना चाहेगी तो हम राजनीति में जरूर जायेंगे: उद्योगपति प्रवीण झा

बिलासपुर। शहर के बहतराई स्टेडियम में आयोजित युवा शक्ति कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शरीक होने शहर पहुंचे बॉलीवुड एक्टर आशुतोष राणा ने युवाओ को अपनी सफलता का राज बतलाते हुए कहा कि ….आशुतोष राणा का पूरा का पूरा जीवन गुरु कृपा पर आधारित है।

मेरे पूज्य गुरुदेव दद्दा जी ही आशुतोष राणा का मार्ग भी वही थे… मंजिल भी वही थे… और आशुतोष का मंतव्य भी वही है। हमारे पास उनकी कृपा है। उस कृपा का ही परिणाम है । गुरु कृपा का मतलब भी यही होता है… कर और पा। इन दोनो को मिला देने से ही कृपा बनती है। इसमें करते गुरु है और पाते आप है। मेरा पूरा जीवन का प्रत्येक क्षण उनके ही द्वारा निर्देशित है।

हमारा यह मानना है हम और आप जिंदगी के इस पड़ाव में आ जाते है की हम और आप योजनाएं बनाने लगते है लेकिन कुछ लोग परमात्मा को मानते है कुछ लोग प्रकृति को मानते है। लेकिन मेरा यह मानना है कि योजना बनाने का काम उसका है और कार्य रूप में परिणित करने का काम हमारा है।

होता क्या है कि योजनाएं हम बनाने लगते है और कार्यरूप में परिणित करने का कार्य उन्हे सौप देते है की भगवान हमारा ये काम करवा देना हम आपको नारियल चढ़ा रहे है हम इतने का प्रसाद चढ़ा देंगे । इसलिए हमारे जीवन में आनंद के होते हुए भी हम अवसद से भरे होते है।इसलिए मेरा यह मानना है कि योजना उन्होंने बनाई है और कार्यरूप में परिणित करने का काम हमारा है।

किसी के माता पिता उनके गुरु के जैसे होते है… किसी के शिक्षक उनके गुरु के जैसे होते है…तो किसी के मित्र उनके गुरु के जैसे होते है… तो किसी के लिए कोई अपरिचित भी उनके लिए जीवन भर गुरु तुल्य कार्य कर देता है।

गुरु का कार्य ठीक उसी तरह है जैसे आप रोड पर चल रहे होते है और आप साइन बोर्ड देखते है जिसमे लिखा होता है आगे अंधा मोड़ है या आगे स्पीड 20 या 30 की है ।अगर आप उस साइन बोर्ड को देखते हुए गाड़ी चलाते है तो आपकी गाड़ी बिना दुर्घटना के बिना क्षति ग्रस्त हुए आबाद गति से अपने लक्ष्य को पहुंचती जायेगी लेकिन चूक तब हमसे हो जाती है जब साइन बोर्ड तो लगे होते है लेकिन कही न कही हम उन्हे चिन्हित नही कर पाते है, उन्हे देख नही पाते और फिर हमारी जिंदगी की जो गति है वह दुर्गति में बदल जाती है।

गुरु आपको कड़क नही करते गुरु आपको करेक्ट करते है। उनके द्वारा दिए गए निर्देशो का पालन हमारे और आपके जीवन के सुख,सफलता, संतोष और सार्थकता का कारण होता है। क्योंकि सफलता और सार्थकता में बड़ा अंतर होता है। सफलता व्यक्तिगत पास की तरह लगती है लेकिन सार्थकता जैसे आप घर बनाते है तो चार दिवार एक साथ खड़ी करते है अगर सिर्फ एक दीवार खड़ी हो जाए तो उसे क्या कहेंगे हम और आप?एक दीवाल जहा खड़ी होती है वह सूटिंग रेंज में इस्तमाल होती है लेकिन चार दिवारी एक साथ एक समान बनती है तो उसमे छत डलवाते है तो वह दीवारे दिवारे न हो कर घर के रूप में परिणित हो जाती है। व्यक्ति की सफलता भी एक दीवार की जैसी है और वही सफलता जब घर के रूप में परिणित हो जाता है तब वह सार्थकता जैसी हो जाती है।

हमारे जीवन का पूरा का पूरा जो आप देख रहे है। जैसे माता पिता मेला में अपने छोटे बच्चो को अपने कंधो पर बिठाकर रखते थे और बच्चो के हाथ में फुग्गे है,चकरिया है, मिठाइयां है और बच्चे एंजॉय बच्चे कर रहे होते थे और श्रम माता पिता कर रहे होते थे। बच्चो को मेले में बड़ा आनंद आता था और माता पिता को इसमें आनंद आता था कि बच्चे हमारे कंधे में बैठकर उस आनंद का आनंद उठा रहे है। बिलकुल हमारे जिंदगी का सफर भी ऐसा ही रहा है कि श्रम हमारे पूज्य गुरुदेव जी ने किया और आनंद हम उठा रहे होते है।

कार्यक्रम के आयोजक सुप्रसिद्ध उद्योगपति व समाज सेवक प्रवीण झा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि देश के युवा अगर इसी तरह मिलकर काम करते रहेंगे तो देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था बन जायेगी। इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी सबसे बड़ा योगदान रहेगी।

उन्होंने कहा कि आज वे उद्योगपति व समाज सेवी के रूप में समाज के हित में काम कर रहे है। हम हर क्षेत्र में काम करना चाहते है अगर हमारी जनता खासकर हमारे युवा हमे राजनीति में लाना चाहती है तो हम राजनीति में भी जरूर आयेंगे। समाज सेवा हम करते आ रहे है। जहा हमारी जनता हमे देखना चाहती है हम वहा जरूर जायेंगे हम हमेशा उनके साथ रहेंगे।