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बिलासपुर

मंदिर तोड़ने से देवता का अस्तित्व समाप्त नहीं होता – विष्णु शंकर जैन • कलम की ताकत तलवार की ताकत से बड़ी होती है, जब तक प्राण है अध्यात्मक को ऊंचा रखने के लिए लड़ते रहेंगे : सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता : विष्णु शंकर जैन •अयोध्या एवं ज्ञान व्यापी मंदिर मामले में हिंदू धर्म की और से पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन को सुनने उमड़ी जनता की भारी भीड़

बिलासपुरज्ञान व्यापी मंदिर एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि मथुरा में हिन्दू धर्म की ओर से पैरवी कर रहे सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन ने रविवार को वंदे मातरम मित्र मंडल के 3 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सिम्स आडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रमुख वक्त के रूप शामिल हुए।

इस दौरान मुख्य वक्त के रूप में पधारे सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता  विष्णु शंकर जैन के कहा कि हमारा समाज घोर आपातकाल से गुजर रहा है। इस समय आप और हमारे बीच क्या हो रहा है इससे ज्यादा यह जानना जरूरी है कि न्यायालय में क्या हो रहा है।काशी विश्वनाथ और ज्ञान व्यापी हमारे अधिकार, हमारे अस्मिताओं से जुड़ा है। उसे न्यायालय में चुनौतियां दी जाती है। जितने मंदिरों में केस चल रहे है वह सब हमारी और आपकी आस्था व अश्मिता से जुड़ा हुआ है

उन्होंने कहा कि सभागार में पहले लोग बुलाये जाते थे लेकिन आज लोग आ रहे है। इसका सबसे बड़ा कारण अंदर की पीड़ा, अंदर का दर्द है। आध्यात्मिक ऊर्जा सब में विराजमान है। जो हमारे आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र है वह काशी और, मथुरा में है। उसे मुक्त कराना बहुत जरूरी है। लोग हमसे सवाल पूछते है कि राम मंदिर बनाना क्यों जरूरी है। 22 जनवरी 2024 को भगवन राम मंदिर में विराजमान हुए थे। आज तक की इतिहास में ऐसा स्वर्णिम क्षण इतिहास में कभी किसी ने नहीं देखा। उन्होंने कहा कि  राम मंदिर का जो जजमेंट आया है वह हम सबके लिए बॉन्डिंग है। चाहे आप प्रत्यक्ष रूप से उसने इन्वॉल्व हो या न हो।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम कहते है कि हमारी मस्जिद थी तो कयामत तक रहेगी। हिन्दूओ की 3 किताबो में लिखा है कि मंदिर तोड़ने से देवता का अस्तित्व समाप्त नहीं होता।  हिन्दू शास्त्रों में भी लिखा है। मुस्लिम ,क्रिश्चन की मस्जिद व चर्च एक जगह है इकट्ठा होने की। जबकि हिन्दू देवी देवता एक जीवंत प्राणी है। जिसे मिटाया नहीं जा सकता। मंदिर आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। भले हमारे मंदिर तोड़ दो लेकिन वहां देवता अप्रत्क्ष रूप में विराजमान रहते है। अतः वापस स्थापना किया जाए यह सनातन धर्म कहता है। जिस तरह कंपनी के इंडेंटूटी रहती है डायरेक्टर बदलते रहते है वैसी मंदिर ही पुजारी बदलते रहते है पर मंदिर कभी नहीं बदलता। लेकिन यह लीगल प्रोविजन हमे बताई नहीं जाती।

उन्होंने कहा कि गुरु ग्रन्थ साहब के ग्रन्थ गुरु सखी में भी राम मंदिर का है जिघ्र है। सारे धर्मों को बराबर कहना मिथ्या है। सरकार सेकुलर हो सकती है, लोग कभी सेकुलर नहीं हो सकते। सभी धर्म मानता है कि उसका धर्म सुप्रीम है और हम सर्वोच्च है।

उन्होंने ज्ञान व्यापी का केस की चर्चा करते हुए कहा कि हमने वाराणसी के डिस्टिक कोर्ट में इसकी केस फाइल किया। कोई भी मामला कोर्ट के मध्यम से ही हल हो सकता है, इसकी शुरुआत करना जरूरी था। पार्लियामेंट इसकी सुनवाई नहीं कर पाएगा। कोर्ट को अधिकार है कि दोनों का पक्ष सुनकर फैसला करे। ज्ञान व्यापी मामले में भी जस्टिज ने पहले ऑर्डर किया एडवोकेट कमिशन की टीम भेज कर जांच कराया ।  सर्वे में ज्ञान व्यापी के अंदर देवी देवताओं के मूर्ति और चिह्न मिले। उनके कलेंडर के पीछे छिपा डमरू, श्लोक, स्वस्तिक के चिन्ह मिले। लेकिन शिवलिंग की si जांच का आदेश को अंजुमन ने रोक की मांग को लेकर सुप्रीम कोट चले गए जिसे कोर्ट ने रोक लगा दिया लेकिन यह लड़ाई हमारी जारी रहेगी।

उन्होंने कहा कि Si ने आधुनिक उपकरणों से अध्ययन कर तो पाया पूर्व में यह मंदिर था। ज्ञान व्यापी के मामले में हम जीत के दहलीज पर खड़े है। जिस दिन शिव लिंग का सर्वे का आदेश होगा उस दिन हमारी महादेव का अभिषेक तय है। हमारी मांग है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में इसकी सुनवाई हो। जिससे जल्द से जल्द ज्ञानवापी का सच सामने आ जाएगा।

उन्होंने श्री कृष्ण जन्मभूमि के संबंध में भी बताया कि  श्री कृष्ण जन्म भूमि भी आक्रांता के शिकार हुए। वे सिर्फ हमारे मंदिरों को ही तोड़ा क्योंकि सनातन समाज को तोड़ना है तो उनके आध्यात्मिक ऊर्जा के केंद्र को तोड़ो।

श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट का निर्माण हुआ था। लेकिन श्री कृष्ण जन्म भूमि सेवा संघ नाम की एक और ट्रस्ट फर्जी तरीके से बनाकर मंदिर की 13 .3 एकड़ की जमीन को शाही ईदगाह मस्जिद से समझौता कर बेच दिया गया जो बहुत महत्वपूर्ण जगह थी । जिसमें कंस का कारागृह है। अब मंदिर के पास सिर्फ 11 एकड़ भूमि ही बची हुई  है। जिसका इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रायल चल रहा है।

उन्होंने कहा कि कलम की ताकत तलवार की ताकत से बड़ी होती है। जब तक प्राण है अध्यात्मक को ऊंचा रखने के लिए लड़ते रहेंगे।

उन्होंने ताजमहल के बारे में कहा कि हम नहीं जानते और ताजमहल को देखने जाते है उसके सामने खड़े होकर सेल्फी लेते है लेकिन क्या कारण है कि 27 जैन एवं हिन्दू मंदिरों के मलबे से बना है यह ताजमहल में लिखा है। जब तक आप अपने आध्यात्मिक केंद्र से नहीं जुड़ेंगे धर्मांतरण नहीं रुकेगा। आप अपने अधिकारो के लिए बोले नहीं सकते, तो चीखों, और चीख भी नहीं सकते तो जो बोल रहा है उसके साथ खड़े रहो।

आरएसएस के क्षेत्र संचालक डॉक्टर पूर्णेन्दु सक्सेना ने कहा कि आज देश कई संकटों से गुजर रहा है, भारत तेरे टुकड़े  हो इसके कई प्रयास हो रहे है। धर्मांतरण रोकने कई कानून बने हुए है लेकिन उसका पालन नहीं हो रहा। आज मरने के बाद भी धर्मांतरण हो रहा है।

उन्होंने कहा कि कानून अंधा होता है, वह देखे उसकी कोशिश होती है। काशी विश्वनाथ मंदिर है लेकिन कानून को दिखाना पड़ता है। कृष्ण जन्मभूमि है यह सब को मालूम है लेकिन कानून को दिखाना पड़ता है। ये सब आसान दिखता है लेकिन इसमें बहुत सी जटिलताएं होती है। इससे कैसे निपटना चाहिए ये काम हमारे सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जी ने किया।

इस बीच वंदे मातरम् मित्र मंडल की शोभा त्रिपाठी ने अभिनंदन पत्र का वाचक कर मुख्य अतिथियो का अभिनंदन किया। वही सुप्रसिद्ध लेखक लोकेश शरण ने अपनी लिखी किताब  “कालापानी” उन्हें सप्रेम भेट किया। कार्यक्रम का सफल संचालन आर एस एस के प्रफुल्ल शर्मा ने की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आरएसएस,बीजेपी के कार्यकर्ताओं के साथ समाज के अलग अलग वर्गों के लोग उपस्थित रहे और सिम्स आडिटोरियम हॉल खचाखच भरा रहा।