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बिलासपुर

छत्तीसगढ़ी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ की 17 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू – प्रशासनिक तंत्र में हलचल

बिलासपुर।छत्तीसगढ़ी कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ ने राज्य शासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर धरना आंदोलन शुरू कर दिया है। प्रदेशभर के तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के निराकरण की मांग कर रहे हैं।

संघ का कहना है कि बार-बार शासन को ज्ञापन देने के बावजूद ठोस कार्यवाही नहीं हो रही, जिससे उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।

संघ की प्रमुख मांगें:

1. स्वीकृत पदों की पदस्थापना:
सभी तहसीलों में कंप्यूटर ऑपरेटर, चपरासी, WBN, KGO, नायब नाजिर, माल जमादार, वाहन चालक, राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी जैसे पदों की त्वरित पदस्थापना की जाए। यदि यह संभव न हो तो लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत निर्धारित समय सीमा की बाध्यता से तहसीलों को मुक्त किया जाए।

2. पदोन्नति में 50:50 का अनुपात:
तहसीलदार से डिप्टी कलेक्टर पद पर पदोन्नति में सीधी भर्ती और प्रमोशन का अनुपात 50:50 रखा जाए और पूर्व में की गई घोषणा को लागू किया जाए।

3. नायब तहसीलदार को राजपत्रित दर्जा:
पहले से की गई घोषणा के अनुरूप नायब तहसीलदार पद को राजपत्रित करने की मांग।

4. ग्रेड पे सुधार:
तहसीलदार और नायब तहसीलदार के लंबित ग्रेड पे में शीघ्र सुधार की मांग।

5. शासकीय वाहन की व्यवस्था:
सभी तहसीलों में प्रशासनिक कार्यों एवं लॉ एंड ऑर्डर ड्यूटी के लिए शासकीय वाहन व चालक की व्यवस्था की जाए या वैकल्पिक रूप से वाहन भत्ता दिया जाए।

6. निलंबन से शीघ्र बहाली:
बिना वैध आदेश व प्रक्रियात्मक त्रुटियों से प्रभावित अधिकारियों की जांच 15 दिनों में पूर्ण कर बहाल किया जाए।

7. न्यायालयीन मामलों का सही संचालन:
न्यायालयीन प्रकरणों को जनशिकायत श्रेणी में शामिल न किया जाए।

8. न्यायिक आदेशों पर FIR नहीं:
सक्षम न्यायालय की अनुमति के बिना पारित आदेशों पर FIR या मीडिया ट्रायल न किया जाए। न्यायाधीश संरक्षण अधिनियम के अनुरूप स्पष्ट निर्देश जारी किए जाएं।

9. न्यायालयीन कार्यों हेतु समुचित व्यवस्था:
न्यायालय में उपस्थित होने वाले अधिकारियों को प्रोटोकॉल ड्यूटी से मुक्त रखा जाए।

10. स्टाफ की आउटसोर्सिंग से नियुक्ति:
तहसीलदार को आउटसोर्सिंग से स्टाफ नियुक्त करने की अनुमति दी जाए।

11. तकनीकी कार्यों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर:
Agristack, स्वामित्व योजना, e-Court व भू-अभिलेखीय कार्यों के लिए प्रशिक्षित ऑपरेटर की नियुक्ति हो।

12. SLR/ASLR की बहाली:
भू-अभिलेखीय कार्यों हेतु SLR/ASLR की पुनर्बहाली की मांग।

13. मोबाइल नंबर की गोपनीयता:
TI की तरह पदेन शासकीय मोबाइल नंबर और डिवाइस उपलब्ध कराया जाए।

14. सुरक्षाकर्मी की तैनाती:
तहसीलों में सुरक्षा कर्मी तैनात किए जाएं तथा फील्ड भ्रमण हेतु वाहन की व्यवस्था हो।

15. आपदा में त्वरित सहायता के लिए दिशा-निर्देश:
सड़क दुर्घटना या अन्य आपदा में तत्काल ₹25,000 की सहायता राशि हेतु स्पष्ट गाइडलाइन शासन द्वारा जारी की जाए।

16. संघ को मान्यता:
तहसीलदार-नायब तहसीलदार संघ को शासन स्तर पर मान्यता दी जाए, जिससे वार्ता एवं समाधान में संघ की भूमिका हो।

17. विशेषज्ञ कमिटी का गठन:
राजस्व न्यायालय की सुदृढ़ता के लिए विशेषज्ञ कमिटी/परिषद का गठन हो।

संघ का कहना है कि यदि इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की जाती है, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे प्रदेश में तहसील स्तर पर प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।