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बिलासपुर

शहीद वीरेंद्र कुमार कैवर्त को 19 साल बाद भी नहीं मिला उचित सम्मान, पूर्व सैनिकों ने उनकी शहादत की याद में स्मारक बनाने की मांग सरकार से की

बिलासपुर। भारतीय सेना के शहीद लांस नायक वीरेंद्र कुमार कैवर्त, जो मूल रूप से ग्राम नरगोड़ा, तहसील मस्तूरी, जिला बिलासपुर के निवासी थे, की शहादत को लगभग 19 वर्ष पूरे होने वाले हैं। लेकिन अब तक उनके सर्वोच्च बलिदान के सम्मान में कोई भी स्थायी पहल नहीं की गई है।

ऑन पूर्व सैनिक कल्याण संगठन के अध्यक्ष दत्तात्रेय यादव ने अपने साथियों के साथ एक प्रेसवार्ता कर जानकारी देते हुए बिलासपुर प्रेस क्लब में कहा कि शहीद वीरेंद्र कुमार कैवर्त भारतीय सेना की 225 मीडियम रेजिमेंट (तोपखाना) में पदस्थ थे और वहां से वे 62 राष्ट्रीय राइफल्स में डेपुटेशन पर जम्मू-कश्मीर भेजे गए थे। 15 सितंबर 2006 को पुलवामा जिले के रेबन गांव में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान एक IED विस्फोट में वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उपचार के दौरान 92 बेस अस्पताल में उन्होंने वीरगति प्राप्त की। बिलासपुर जिले के इतिहास में वे भारतीय सेना के प्रथम शहीद माने जाते हैं।

शहीद की शहादत को यादगार बनाने के लिए बिलासपुर जिले के लगभग 3000 पूर्व सैनिकों के संगठन ने जिला प्रशासन एवं सरकार से मांग की है कि—

ग्राम नरगोड़ा में शहीद वीरेंद्र कुमार कैवर्त की प्रतिमा स्थापना की जाए।

किसी विद्यालय, सड़क, ग्राम प्रवेश द्वार एवं खेल मैदान का नाम उनके नाम पर रखा जाए।

हर वर्ष 15 सितंबर को बलिदान दिवस के रूप में प्रशासनिक स्तर पर मनाया जाए।


पूर्व सैनिकों और ग्रामवासियों का कहना है कि इस पहल से आने वाली पीढ़ियां शहीद के त्याग और बलिदान को सदैव याद रखेंगी।

अब जिले भर में शहीद को उचित सम्मान दिलाने की आवाज तेज हो गई है, जिसका समर्थन आम जनमानस और बुद्धिजीवी वर्ग भी कर रहा है।