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बिलासपुर

पीयूसीएल ने नफरती एजेंडा का किया विरोध, केरल में छत्तीसगढ़ प्रवासी मजदूर रामनारायण बघेल को उचित न्याय की मांग की, तमनार में पुलिस द्वारा आरोपी को जूतों की माला और लिपिस्टिक लगाकर घूमाने को बताया अनुचित

बिलासपुर। अल्पसंख्यकों, प्रवासियों, बांगली भाषियों, दलितों और अन्य उत्पीड़ित समुदायो के लोगों की मॉब लिचिंग हत्या कर व्यापक अराजकता आतंक फैला रहा है। उन पर सख्त कार्यवाही करने की आवश्यकता हैं।


पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (लोक स्वातंत्र संगठन PUCL) नेशनल सचिव एवं राजस्थान अध्यक्ष एवं के छत्तीसगढ़ ईकाई के पदाधिकारियों एवं हमारे सम्मानित अतिथि पी.यू.सी.एल. नेशनल सचिव एवं राजस्थान एवं जाने माने दलित विचारक लेखक भंवर मेघवंशी जी ने बिलासपुर में प्रेस वार्ता संबोधित कर पूरे देश में हो रहे मॉब लिचिंग की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई ।


उन्होंने कहा कि 17 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के निवासी 31 वर्ष दलित मजदूर रामनारायण बघेल, जो केरल के पालक्कड़ जिले में मजदूरी करने गये थे, को बंगलादेशी कहकर बेरहमी से पीट पीट कर मार डाला गया था। केरल सरकार ने इस मामले में 5 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें अधिकांश बीजेपी-आरएसएस पृष्ठभूमि के और एक सीपीएम के पूर्व स्थानीय छुटभैये नेता है। बंगाली भाषियों के प्रति यह नफरत हाल ही में ओडिशा में पश्चिम बंगाल के एक प्रवासी मजदूर की मौत का कारण बना। केरल की घटना को लेकर प्रवासी मजदूर संगठनों का संयुक्त मोर्चा (PMSSM) एवं सहमना संगठन मिलकर आगे विस्तृत कार्यक्रम लिया जाना है।

परन्तु छत्तीसगढ़ के अंदर भी 15-17 दिसम्बर को कांकेर के बड़े तेवड़ा और आमाबेड़ा गांवों के आसपास के ईसाई व्यक्ति के कफन दफन को लेकर तीन दिनों तक विवाद खड़ा किया गया आईर इसाइयों के विरूद्ध भयंकर हिंसा, उनके घरों चर्चा की आगमनी और तोड़ फोड़ किया गया। स्थानीय दंगाइयों को जनजाति सुरक्षा मंच जैसे दक्षिण पंथी संगठनों द्वरा लागतार धर्मान्तरण का झूठा एजेंडा लेकर उकसाया गया था, इन मामलों को लेकर कोई भी कानूनी कार्यवाई नहीं किये जाने से न केवल ईसाई समुदाय दहशत में है, पर अब मृत्यु के बाद, स्वयं की जमीन में भी, एक सम्माजनक कफन-दफन जैसे मूल मानवाधिकार से वंचित है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुत क्षेत्र में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र व मानवाधिकार का उल्लंघन हो रहा है। मूल निवासी बचाओ मंत्र (BMB) पर प्रतिबंध हटाने के बाद भी सरकार द्वारा जेल में बंद लोगों को नहीं छोड़ा जा रहा है। जबकि सरकार के गृहमंत्री ने सार्वजनिक रूप से जेल बंदियों को छोडे जाने की बात कही लेकिन ऐसा नहीं कर वादाखिलाफी कर लोगों को प्रताड़ित किया जा रहा है।

जुलाई 2025 में ज्योति शर्मा के नेतृत्व में बजरंग दल के लोगों ने दो ननों और उनके साथ एक आदिवासी युवा पर धर्मान्तरण और मानव तस्करी के झूठे आरोप लगाकर दुर्ग रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार करवाया, पवर उनके साथ जा रही वयस्क आदिवासी युवतियों द्वारा जब पुलिस अधीक्षक से मिलकर बजरंग दल के लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाना चाहा तो वह दर्ज नहीं हुआ, जबकि बिलासपुर जिला के तखतपुर में एक सार्वजनिक धार्मिक कार्यक्रम में कथावाचक चैतन्य द्वारा जानबुझकर सतनामी समुदाय के प्रति हेड स्पीच रहेगा। लोगों के आकोश में एफआईआर तो हुआ लेकिन पर्याप्त धारा लगाकर उन्हें जेल जाने के रोकने ताबड़तोड़ षडयंत्र प्रशासन ने गैरकानूनी कार्य किया और बिना जेल भेजे छोड़ दिया।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसे और भी मामले हैं जहां व्यक्तिगत लड़ाई झगड़े को हिन्दू मुस्लिम सांप्रदायिक रूप देकर नफरत फैलाया जाता है। मैग्नेटो मॉल में सांता क्लाउस तथा अन्य किसमस डेकोरेशन को तहस नहस करने वाले 8 बजरंग दल के लोगों को जब जनवरी को जमानत मिली तो उनका हीरो की तरह स्वागत किया गया और शहर में जुलूस निकाला गया ।

हैट स्पीच (नफरती भाषण) और “मॉब लिचिंग” पर सुप्रीम कोर्ट का कई महत्वपूर्ण सख्त आदेश है और हमारा संविधान हर नागरिक को अपनी स्वेच्छा से किसी भी धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता प्रदान करता है। इसके बावजूद प्रशासन, पुलिस और न्यायालयों द्वारा नफरती भाषण ही नहीं, नफरती कार्रवाई, दंगा आगजनी, हत्या और मोब लिचिंग की घटनाओं पर गंभीरता से कार्रवाई न करना, ऐसे उप्रदवियों के हौसलों को बढ़ाते जा रहा है. स्वाभाविक है कि नागरिकों के मन में यह प्रश्न उठता ही है कि क्या संविधान की शपथ लेनी वाली केंद्र और राज्य सरकारें ऐसे तत्वों को राजनैतिक संरक्षण दे रही है।

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज पुलिस और प्रशासन से मांग करता है कि धार्मिक, भाषाई या प्रवासी के आधार पर नफरती एजेंडा प्रसारित करने वाले, दंगा भड़ाकने वाले, और इस प्रकार से हत्या, आगजनी और मॉब लिचिंग जैसे अपराधों में संलिप्त संगठित गिराहों पर कानून के अनुसार सख्त से सख्त कार्रवाई की जाये।

पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज समस्त नागरिकों से अपील करता है कि हमारे इस बहुभाषी, बहुधर्मी, एवं विविध संस्कृतियों वाले देश में, हम हर नागरिक के मूल अधिकारों और उनकी गरिमा का सम्मान करें, नफरती एजेंडा के बहकावे में आकर कोई अपराधिक कृत्य न करें, बल्कि संविधान में उल्लेखित बंधुत्व (फ्रेटरसिटी) का पालन करें।