लिंगियाडीह बचाव आंदोलन 98वें दिन भी जारी; प्रशासन पर 138 गरीब परिवारों को उजाड़ने का आरोप
पिछले 3 माह से चल रहा धरना बना जन आंदोलन

बिलासपुर। बिलासपुर के लिंगियाडीह दुर्गा नगर क्षेत्र में 138 गरीब परिवारों को बेदखली से बचाने के लिए चल रहा “लिंगियाडीह बचाव आंदोलन” रविवार को 98वें दिन भी पूरे जोश के साथ जारी रहा। आंदोलन के इस लंबे दौर में सैकड़ों महिलाएं धूल में बैठकर प्रशासन और नगर निगम की कार्रवाई के खिलाफ विरोध दर्ज कराती रहीं।

करीब तीन माह से जारी यह आंदोलन अब जनआंदोलन का रूप ले चुका है। इसे विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों का समर्थन मिल रहा है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि सरकार सत्ता में आने से पहले गरीबों के हित में बड़े-बड़े वादे करती है, लेकिन सत्ता मिलने के बाद उन्हीं गरीबों को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि लिंगियाडीह के 138 परिवारों की आजीविका पर संकट मंडरा रहा है। यदि प्रशासन की कार्रवाई जारी रही तो वे सड़क पर आने को मजबूर हो जाएंगे। लोगों ने आरोप लगाया कि गरीबों के घरों को तोड़ा जा रहा है और उन्हें जमीन से बेदखल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए चेतावनी दी कि राहत नहीं मिलने पर आंदोलन और तेज किया जाएगा।
धरना स्थल पर आंदोलनकर्ताओं ने कहा कि सरकार एक ओर धार्मिक नारों के साथ शासन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गरीबों को उजाड़ने का काम कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्रीय विधायक के दबाव में नगर निगम प्रशासन कार्रवाई कर रहा है।
धरने में शामिल श्रीमती यशोदा पाटिल सहित अन्य महिलाओं ने बताया कि पट्टा देने के नाम पर प्रति वर्गफुट 10 रुपये की दर से राशि वसूली गई, लेकिन आज तक पट्टा नहीं दिया गया। अब मकान तोड़ने के नोटिस थमाए जा रहे हैं। महिलाओं का कहना है कि क्षेत्र पहले ही आवासीय घोषित किया जा चुका है, इसके बावजूद गार्डन और व्यवसायिक कॉम्प्लेक्स के नाम पर गरीबों को हटाने की कोशिश की जा रही है।