
बिलासपुर : एसईसीएल से अप्रेंटिस ट्रेनिंग करने वाले पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को ले कर SECL मुख्यालय के सामने धरने पर बैठे है। जिन्होंने बुधवार को अपने आंदोलन तो तेज करते हुए SECL गेट को बंद कर गेट के सामने जमीन पर बैठकर पूरे दिन नारे बाजी करते रहे,जिससे SECL मुख्यालय के अंदर कोई भी कर्मचारी आ जा नही सका और मुख्यालय का पूरा काम-काज ढप रहा।

एसईसीएल में अप्रेंटिस करने वाले छात्रों की मांग है की अप्रेंटिस पूरी होने पर उन्हें एसईसीएल में नौकरी दी जाय लेकिन प्रबंधन ने कहा की ऐसा कोई प्रावधान ही नही है।
प्रबंधन ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि कोयला मंत्री ने सासद को स्पष्ट रूप से यह जानकारी दे दी है की अप्रेंटिस को नियमित या स्थाई लेने का कोई नियम ही नही है। साथ ही यह भी कहा की देश भर में बिजली संकट की चुनौतियों के बीच कोल- डिस्पैच के डिलीवरी ऑर्डर भी जारी नहीं हो सके। इनमें छतीसगढ़ राज्य में स्थित नॉन पावर व लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रदाय किए जाना वाला कोयला शामिल है। उत्पादन, डिस्पैच, मशीनीकरण से जुड़े टेंडरों/कॉंट्रैक्ट अवार्ड का काम ठप्प रहा वहीं सामग्री प्रबंधन विभाग आज कोई क्रय आदेश जारी नहीं कर सका । कुछ कार्य जिनकी डेडलाइन आज थी, से जुड़े अधिकारी-कर्मचारी देर शाम तक मुख्यालय के बाहर इंतज़ार करते रहे किंतु पूर्व अप्रेंटिस प्रशिक्षु गेट को जाम कर बैठे रहे तथा किसी को कार्यालय नहीं जाने दिया गया ।
विदित हो कि एसईसीएल प्रबंधन द्वारा पिछले लगभग ढाई महीने में पाँच बार पूर्व आईटीआई अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं से बात की गई है जिसके अंतर्गत गत पाँच अगस्त को सीएमडी एसईसीएल डॉ प्रेम सागर मिश्रा ने स्वयं प्रतिनिधि दल से बात की थी ।
ज्ञात हो कि, हाल हीं में सम्पन्न संसद के मानसून सत्र के दौरान कोयला मंत्री भारत सरकार माननीय श्री प्रल्हाद जोशी ने स्पष्ट कर दिया था कि ट्रेड अप्रेंटिस का नियमितिकरण नहीं किया जा सकता है । अप्रेंटिस एक्ट 1961(यथा संशोधित 2014) में अप्रेंटिस प्राप्त प्रशिक्षुओं को नियमित किए जाने का कोई प्रावधान नहीं है । पूरे देश में सार्वजनिक उपक्रम इस प्रकार के अप्रेंटिस के प्रशिक्षण की व्यवस्था करते हैं और इस सम्बंध में भारत सरकार के नियम स्पष्ट हैं ।