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बिलासपुर

छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ, अपने नियमितीकरण संबंधित तीन सूत्री मांगों को लेकर निकाली बैलगाड़ी रैली

बिलासपुर : छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ द्वारा शनिवार को अपने तीन सूत्रीय मांगो को लेकर बैलगाड़ी के साथ काले कपड़े पहन कर रैली निकाली और मुखमंत्री एवम संभागायुक्त के नाम ज्ञापन सोपा।

उपरोक्त विषयांतर्गत वर्ष 2006 में केन्द्र में कांग्रेस पार्टी की सरकार द्वारा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के नाम पर मनरेगा योजना की शुरूवात किया गया था। छत्तीसगढ़ राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजनांतर्गत कार्यरत अधिकारी, कर्मचारी एवं ग्राम रोजगार सहायक विगत 16 वर्षो से निरंतर कार्य कर रहे है एवं आपके महत्वपूर्ण “ड्रीम प्रोजेक्ट- नरवा, गरवा, घुरवा. बारी” व “गोधन न्याय योजना” का जमीनी स्तर पर सफल क्रियान्वयन मनरेगा कर्मियों के द्वारा ही किया जा रहा है।

मनरेगा कर्मियों के द्वारा लोकसभा, विधानसभा, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव सहित विभिन्न निर्वाचन एवं अन्य योजनाओं के कार्य कुशलतापूर्वक संपादित किये जाते रहे हैं।

कोविड महामारी के दौरान हमारे बहुत से मनरेगा कर्मियों की मृत्यु हुई उसके पश्चात् भी मनरेगा के कार्य लॉकडाउन अवधि में भी पूर्ण लगन से संचालित किया गया था।

छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष महेंद्र भारद्वाज ने बता दे कि ऑकस्मिक वित्तीय राशि से हिमाचल प्रदेश, उडीसा सहित विभिन्न राज्य सरकारों के द्वारा मनरेगा में कार्यरत् मनरेगा कर्मियों को नियमित कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ में भी मनरेगा कर्मियों के स्थायीकरण/ नियमितीरण हेतु कोई बड़ी राशि का अतिरिक्त बजट भार छ.ग. शासन को नही आयेगा। परंतु चार वर्षों के उपरांत भी कांग्रेस पार्टी के जनघोषणा पत्र 2018 के अनुसार मनरेगा कर्मियों का नियमितीकरण संबंधी मांग आज पर्यन्त तक लंबित है।

श्री भारद्वाज ने बताया कि उक्त तारतम्य में 04 अप्रैल, 2022 से “छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ” के समस्त 28 जिलों के सभी मनरेगा कर्मियों के द्वारा 72 दिवस का अनिश्चित कालीन हड़ताल किया गया था। साथ ही हमारे द्वारा 12 अप्रैल, 2022 से 30 अप्रैल, 2022 के मध्य 19 दिवस का माता दंतेश्वरी के आशीर्वाद से ना दंतेश्वरी के मंदिर प्रांगण से राजधानी रायपुर के बुढ़ा तालाब धरना स्थल तक लगभग 400 किलोमीटर की तिरंगा पदयात्रा निकाली गई थी।

उस दौरान केबीनेट मंत्री कवासी लखमा जी के द्वारा आपकी अनुमति से 08 जून, 2022 को 06 माह से पूर्व हमारी मांगो को पूर्ण करने का घोषणा एवं आश्वासन हमारे धरना स्थल पर आकर मंच से किया गया था। परंतु तदसंबंध में हमारी प्रमुख दो सूत्रीय मांगें तथा अनिश्चितकालीन हड़ताल अवधि का वेतन / मानदेय आज पर्यन्त तक लंबित हैं। जिसके कारण छत्तीसगढ़ प्रदेश के समस्त मनरेगा कर्मियों में अति रोष एवं आक्रोश व्याप्त है।

छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ की प्रमुख मांग :-

1. आपके चुनावी जन घोषणा पत्र वर्ष 2018 को आत्मसात करते हुए समस्त मनरेगा कर्मियों का नियमितीकरण किया जावे।

2. नियमितीकरण की प्रक्रिया पूर्ण होने तक ग्राम रोजगार सहायकों का वेतनमान निर्धारण करते हुए समस्त मनरेगा कर्मियों पर सिविल सेवा नियम 1966 के साथ पंचायत कर्मी नियमावली लागू किया जावे।

3. अनिश्चितकालीन हड़ताल अवधि 72 दिवस का लंबित वेतन / मानदेय भुगतान ।

श्री भारद्वाज ने कहा कि सरकार मनरेगा कर्मियों की प्रमुख मांगो पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए मांगो को तत्काल पूरा करें। यदि 26 जनवरी, 2023 तक छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ की मांगे पूरी नहीं होती हैं तो उस स्थिति में समस्त मनरेगा कर्मी अपनी मांगों एवं अधिकार को लेकर पुनः अनिश्चितकालीन हड़ताल करने को मजबूर / विवश होंगे, जिसकी समस्त जवाबदारी शासन / प्रशासन की होगी।