छात्र की जाति बदलने के गंभीर आरोप में निलंबित शिक्षिका को मिला “राज्यपाल शिक्षक सम्मान”, एनएसयूआई के प्रदेश सचिव ने पुरस्कार पर सवालिया निशान लगाते हुए कलेक्टर से मामले की जांच की मांग रखी

बिलासपुर । प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग के उत्कृष्ट शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए “राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार” दिया जाता है। साथ में इस पुरस्कार के साथ कुछ धनराशि एवम एक वेतनवृद्धि का अतिरिक्त लाभ भी दिया जाता है।
वैसे भी राज्यपाल सम्मान से पुरस्कृत होना एक शिक्षक के लिए समाज में बड़े गौरव की बात होती है। लेकिन जब इस सम्मान को पाने की नींव ही आंखों में धूल झोंक कर या कहें जानकारी छिपाकर अधिकारियों से मिलीभगत करके तैयार की जाए तो इसे आप क्या कहेंगे ?
बीते कई वर्षों से राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार की गरिमा कम होने का आरोप हम नही शिक्षक ही लगा रहे हैं क्योंकि जिन शिक्षकों का नाम इस पुरुस्कार के लिए चयनित हो रहा है उसमें से कई ऐसे हैं जो राज्यपाल तो छोड़िए किसी पार्षद से भी सम्मान पाने के भी हकदार नहीं है लेकिन गठजोड़ और भाई भतीजावाद की राजनीति से शिक्षा विभाग भी अछूता नहीं है । यही वजह है कि ऐसे शिक्षक भी राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार पाकर इठला रहे हैं जिनके कार्यकाल की सही तरीके से जांच हो जाए तो पुरस्कार लौटाने की नौबत आ जाएगी ।
एनएसयूआई के प्रदेश सचिव विवेक साहू ने ऐसे ही एक पुरस्कार में सवालिया निशान लगाते हुए बिलासपुर कलेक्टर से जांच की मांग की है।
उन्होंने अपनी मांग में लिखा है कि पंडित रामदुलारे शासकीय उच्चतर माध्यमिक वालक शाला सरकंडा की व्याख्याता श्रीमती पूर्णिमा मिश्रा राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार (वर्ष 2015 से पुरस्कृत है जो उन्हे 2021 में प्राप्त हुआ है इसके संबंध में लेख है कि श्रीमती पूर्णिमा मिश्रा छात्र की जाति बदलने के मामले में विभाग द्वारा निलंबित हो चुकी है और इस मामले में जांच उपरांत दोषी पाए जाने के बाद उन्हें भविष्य के लिए चेतावनी देते हुए उनका स्थानांतरण करते हुए उनकी पदस्थापना नए स्कूल में भी किया गया था।
ज्ञात हो कि राज्यपाल शिक्षक सम्मान पुरस्कार के लिए चयनित शिक्षक निष्कलंक चरित्र का होना चाहिए । इसके लिए आवेदन आमंत्रित करवाते समय इसके संबंध में शपथ पत्र भी लिया जाता है। यह हास्यास्पद है कि जिस शिक्षिका को निलंबन झेलना पड़ा था और जिसके सर्विस बुक में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है उस शिक्षिका को आखिरकार राज्यपाल पुरस्कार मिला तो मिला कैसे और क्या उनके और संबंधित अधिकारियों द्वारा इस जानकारी को छिपाया गया है इसकी जांच होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि यह प्रदेश के सबसे सम्मानित राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार का विषय है ।
गौरतलब है कि व्याख्याता श्रीमती पूर्णिमा मिश्रा शुरुआत से ही विवादित रही हैं। अभी वर्तमान में भी उसके द्वारा स्कूली छात्र छात्राओं और उनके बालकों के नाम से प्राचार्य और स्टाफ के विरुद्ध झूठी शिकायत नगर विधा पास भेजी गई थी जिसका खुलासा और खंडन स्वयं छात्र छात्रा और उनके परिजन लिखित में और वीडियो के जरिए काला प्रबंधन समिति के समक्ष कर चुके हैं और जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा इस मामले की जांच भी की जा रही है
उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौप कर मांग किया है कि व्याख्याता श्रीमती पूर्णिमा मिश्रा को प्रदत्त राज्यपाल शिक्षक पुरस्कार के आवेदन की जांच कराए ताकि इस पुरस्कार का सम्मान बना रहे । एवम जांच में यदि जानकारी नियम विरुद्ध पाए जाए तो संबंधित शिक्षिका पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई हो।
