•” भोजली प्रतियोगिता” का आयोजन शनिचरी, रपटा चौक, चांटीडीह में आज •छत्तीसगढ़ की सस्कृति,परंपरा को बचाये व संजोय रखने के उद्देश्यों से यह आयोजन : विष्णु यादव

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ीया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के सोच के अनुरूप छत्तीसगढ़ी सांस्कृतिक धरोहर भोजली पर्व को बचाए रखने का “भोजली महोत्सव” का आयोजन किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम के सायोजक एवम वार्ड पार्षद विष्णु यादव ने भोजली महोत्सव आज दोपहर 03 बजे से रात्रि 8 बजे तक शनिचरी, रपटा चौक, चांटीडीह बिलासपुर में भोजली प्रतियोगिता का आयोजन रखा गया है।
इस प्रतियोगिता में अधिक से अधिक प्रतिभागी महिलाओं की टोली अपनी भोजली सहित प्रतियोगिता में भाग लेकर इस प्रतियोगिता में शमिल हो सकते है। जिसमे आकर्षक पुरुस्कार दिया जाएगा। इस प्रतियोगिता में कुल 50 अंक निर्धारित किया गया है जो नीचे दर्शित है।
नियम एवं शर्ते निम्नानुसार हैं:-
1.भोजली का रंग परम्परागत हल्का पीला घना एवं ऊंचा होना चाहिए।
2.महिलाओं की टोली की संख्या कम से कम 15 या उससे अधिक होना चाहिए।
3.भोजली की परंपरागत गीत छतीसगढ़ी में होना चाहिए।
4.भोजली गीत छत्तीसगढ़ी में बाजे गाजे एवं नृत्य के साथ होना चाहिए।
5.छत्तीसगढ़ी श्रृंगार वेशभूषा पहनावा के साथ होना चाहिए।
आपको बता दे कि “भोजली महोत्सव” चांटीडीह के द्वारा शनिचरी रपटा चौक में पहली बार आयोजित की जा रही है । जो 31 अगस्त को दोपहर 3 बजे से रात्रि 8 बजे तक आयोजित है। जिस प्रतियोगिता में शहर व आसपास के ग्रामीण अंचल से आए कोई भी प्रतिभागी महिलाए भाग ले सकती।
इस प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार नगद 21,000/- रू. द्वितीय पुरस्कार नगद 17,000/- तृतीय पुरस्कार नगद 15,000/- के साथ शील्ड प्रदान किया जायेगा। तथा चतुर्थ पुरस्कार नगद 12,000/- पंचम पुरस्कार नगद 10,000/- षष्ठम पुरस्कार नगद 7000/- सप्तम् पुरस्कार नगद 5000/- अष्ठम पुरस्कार नगद 3000 /- नवम् पुरस्कार नगद 2000/- दशम् पुरस्कार नगद 1000/- रखा गया है।
कार्यक्रम के आयोजक विष्णु यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ की यह संस्कृति विलुप्त होते जा रही थी। छत्तीसगढ़ की सस्कृति, परंपरा को बचाये रखने व संजोय रखने के उद्देश्यों से इस आयोजन के माध्यम से एक छोटा सा प्रयास किया जा रहा है। ताकि हमारी संस्कृति, हमारी धरोहर सुरक्षित रह सके।
श्री विष्णु यादव ने आगे बताया कि छत्तीसगढ़ के परंपरा के अनुसार भोजली के दिन ही एक दूसरे के कान के ऊपर भोजली लगाकर मितान / मितानिन / महाप्रसाद बदने/बनाने की जो प्रथा वर्षो से चली आ रही थी उसको पुनः जीवित करने के उद्देश्य से इस प्रतियोगिता को किया जा रहा है।
कार्यक्रम में आकर्षक इनामों के माध्यम से लोगों में भोजली महोत्सव के प्रति रूझान बढ़ाना है ताकि आने वाले सालो में भी इस प्रथा को बनाये रखा जा सके।