‘ रेरा’ के आने के बाद भी बिल्डरों की धोखाधड़ी रुक नही रही, श्री सिद्धीविनायक अपार्टमेंट के बिल्डरों ने आज 06 सालो में भी उपभोक्ताओं को फ्लैट बना कर नही दिया

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में छत्तीसगढ़ भू. सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (रेरा) की स्थापना के बाद भी उपभोक्ताओं की परेशानियाँ कम होती नजर नहीं आ रही। दूसरी ओर बिल्डरों के द्वारा लगातार उपभोक्ताओं के साथ छल करने की घटनाएँ बढ़ती जा रही है और उनकी खून पसीने की कमाई का दुर्पयोग बिल्डर्स करते आ रहे है।

ऐसा ही एक मामला राजकिशोर नगर स्थित श्री सिद्धीविनायक अपार्टमेंट का है, जहाँ के पीड़ित उपभोक्ताओं ने मीडिया को बताया है कि श्री सिद्धी विनायक बिल्डकॉन, पार्टनरशिप फर्म के (1) संजय सुल्तानिया, पिता श्री स्व. ओ. पी. सुल्तानिया, मीनाक्षी इन्टरप्राइजेस तिफरा, ओम रानी कुटी, रोहणी विहार, बिलासपुर (छ.ग.) (2) श्रीमती रूचि अग्रवाल, पति स्व श्री विजय अग्रवाल, पार्क के सामने, क्रांति नगर, बिलासपुर (छ.ग.) द्वारा सन् 2017 में सिद्धीविनायक हाईट्स के नाम से 42 फ्लैट का निर्माण कार्य राजकिशोर नगर ओम गार्डन के पीछे प्रारंभ कराया गया एवं उपभोक्ताओ से लिखित एग्रीमेंट करके वादा किया कि 2 वर्ष में सभी सुविआओं के साथ उपभोक्ताओं को फ्लैट हेन्डओवर कर दिया जाएगा। जिसमें 2 लिफ्ट, गार्डन, मंदिर, बाउड्रीवाल, ट्रांसफार्मर आदि का उल्लेख प्रिन्टेड ब्राउसर में सभी उपभोक्ताओ को उपलब्ध कराया गया। किन्तु 6 वर्षो बाद आज तक न ही उपभोक्ताओं को फ्लैट सौंपा गया और नही साईट पर कार्य कराया जा रहा है।
लगभग 42 उपभोक्तओं की गाढ़ी कमाई का पैसा, बिल्डर्स ने हड़प लिया एवं फ्लैट कब सौपेंगे पूछने पर कोई भी पार्टनर संतोषप्रद जवाब उपभोक्ताओ को नहीं दे पा रहे। थक हारकर 10 उपभोक्ताओं ने वकील के माध्यम से (रेरा) में एक केश फाईल किया था जिस पर माननीय कोर्ट ने अपना आदेश 21 जून को सुनाया।
माननीय कोर्ट ने दोनो पार्टनर को दोषी मानते हुए यह आदेश दिया कि बिल्डर्स द्वारा 13 माह के भीतर सभी उपभोक्ताओ का फ्लैट सौंपें जाए अथवा ब्याज सहित उपभोक्ताओं की राशि वापिस की जाय ।
ज्ञातव्य हो कि श्री सिद्धी विनायक बिल्डकान (रेरा) मे पंजीकृत नहीं है। अतः विल्डर्स पर (रेरा) द्वारा जुर्माना लगाने की कार्यवाही भी की जा सकती है।
बहरहाल श्री सिद्धीविनायक अपार्टमेंट संघर्ष समीति के सदस्यों का कहना है कि हम (रेरा) के आदेश से सन्तुष्ट नहीं है हम लोगो ने पैसे फ्लैट खरीदने के लिए दिये थे न कि व्याज सहित पैसे वापस लेने के लिए। अतः हमे तो फ्लैट ही चाहिए। अगर शीघ्र ही बिल्डर्स द्वारा फ्लैट नहीं दिए जाते है तो आंदोलन को तेज करने की चेतावनी संघर्ष समिति द्वारा दी गई है।