•जनता को सपना दिखाकर खुद का सपना किया पूरा, दो प्रमुख दलों के नेताओ से मोटी रकम हासिल करके किसे दिया समर्थन? •क्या नेता जी ने चंद पैसों के लिए जनता के साथ-साथ प्रमुख दलों के नेताओं को भी दिया धोखा?

बिलासपुर। अकसर देखा गया है कि चुनाव आते ही वोट कटुआ प्रकृति के प्रत्याशी छिपे बिल से बाहर निकल आते है। उनको पता होता है कि कोई बड़ी राजनीतिक पार्टी उनको अपना प्रत्याशी बनाकर टिकट देगी नही और अगर दे भी दे तो उन्हें दो चार पांच हजार से ज्यादा वोट मिलना नही है। लेकिन फिर भी वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड चुनाव जितने का दम भरते हुए नामांकन फार्म भरते है।
ये नामांकन फार्म भरते समय खूब तामझाम भी करते है ताकि मीडिया में वे दिख सके। लेकिन जैसे-जैसे चुनाव की तिथि नजदीक आती है उनका सांस फूलने लगता है और कुकुरमुत्ते की तरह इधर उधर झांकने लगते है। तलास करने लगते है की कोई बड़ी राजनीतिक पार्टी का प्रत्याशी उनके पास आकर उन्हें बैठने को कहे और वे उनसे कुछ खर्चा पानी लेकर बैठ जाए।
ऐसा बाजार हर चुनाव में हर बार सजता है। जिसमे कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों की बोली बड़ी राजनीतिक पार्टियां लगाते है। कुछ निर्दलीय प्रत्याशियों ने तो इसे अपना बिजनस बना लिया है तो कुछ लोगो ने अपनी आदत।
वर्तमान चूनावी कालखंड में एक अनोखे मामले की जमकर चर्चा है। ख़बरों के मुताबिक एक निर्दलीय प्रत्याशी ने दो प्रमुख दलों के नेताओं को समर्थन देने का वादा करके लेनदेन कर ली? लेकिन जब समर्थन देने की बारी आई तो खुद और समर्थकों का समर्थन एक प्रमुख दल के प्रत्याशी को दे दी।
अब सवाल यह खड़ा हो गया कि निर्दलीय प्रत्याशी ने जिन दो प्रमुख दलों के नेताओं से मिलकर अपनी जेब गरम कर ली, उन दलों के नेताओं को निर्दलीय प्रत्याशी के इस काले करतूत की जानकारी भी है या नही यह तो वही जाने..!! लेकिन यह तो तय है कि दो प्रमुख दलों के नेताओं से साठगांठ कर अपनी जेब गरम करने वाले निर्दलीय प्रत्याशी के लिए दो दलों को समर्थन देना संभव नही है।