
बिलासपुर। रतनपुर में पदस्थ एएसआई पर मारपीट के एक मामले में लेनदेन कर जेल भेजने का गंभीर आरोप लगाया गया है।
पीड़ित पक्ष ने रतनपुर थाना में पदस्थ एएसआई हेमंत सिंह पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे आरोपी पक्ष के साथ साठ गाठ कर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट बनाकर हत्या के आरोप में हम लोगो को बेवजह जेल भेजा है। जो पूर्णतः गलत है । जिसकी वजह से हमें नौकरी से भी सस्पेंड कर दिया गया है। न्याय के लिए अंतिम समय तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी।
उन्होंने बताया कि दो पक्षों में मारपीट के एक मामले की जांच कर रहे एएसआई ने डॉक्टर की गलत रिपोर्ट को आधार बनाकर दूसरे पक्ष के खिलाफ हत्या की कोशिश का जुर्म दर्ज किया, फिर चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। इन चारों में से दो सरकारी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है।
एएसआई हेमंत सिंह की कार्यवाही पर इसलिए सवाल खड़े हो रहे हैं, क्योंकि 7 अक्टूबर 2022 को अपनी पत्नी के नाम पर मार्केट रेट से कम में 1750 वर्ग फीट जमीन की रजिस्ट्री कराई और 10 अक्टूबर को पूछताछ के बहाने बुलाकर चार लोगों को गिरफ्तार किया और जेल भेज दिया।
रतनपुर थाने के गांधीनगर क्षेत्र में 16 जुलाई 2022 को जमीन के सीमांकन के दौरान दो पक्षों में मारपीट की घटना हुई थी। इसमें निरंजन सिंह क्षत्रिय की रिपोर्ट पर अरविंद जायसवाल, रविंद्र जायसवाल, दीपक जायसवाल और अमित जायसवाल के खिलाफ पुलिस ने अपराध दर्ज किया।
वहीं अरविंद जायसवाल की रिपोर्ट पर राजेश सिंह क्षत्रिय और निरंजन सिंह क्षत्रिय के खिलाफ अपराध दर्ज किया गया। दोनों पक्षों पर मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने की धाराओं के तहत ही केस दर्ज हुआ था। इस दौरान राजेश क्षत्रिय बेहोश हो गया। उसे रतनपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सिम्स रेफर कर दिया गया। वहां से दूसरे दिन 17 जुलाई को डिस्चार्ज कर दिया गया।
इस मामले की जांच के दौरान एएसआई हेमंत सिंह ने बड़ा खेल खेला। निरंजन सिंह की पत्नी नीतू सिंह के नाम की 1750 वर्ग फीट की जमीन का बाजार रेट 12 लाख के बजाय 1.28 लाख में अपनी पत्नी नेहा सिंह के नाम पर रजिस्ट्री कराई। 7 सितंबर को रजिस्ट्री हुई। इसके बाद 10 सितंबर को एएसआई ने अरविंद जायसवाल व अन्य को पूछताछ के लिए थाने में बुलाया गया। थाने बुलाने के लिए यह झांसा दिया कि वह मुचलके में छोड़ देगा। जब चारों थाने पहुंचे, तब उन्हें हत्या की कोशिश के जुर्म में गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। जेल जाने के कारण पेशे से शिक्षक अमित जायसवाल और जनपद पंचायत के ड्राइवर रविंद्र जायसवाल को सस्पेंड कर दिया गया।
•डॉक्टर की रिपोर्ट फर्जी पाया गया
स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. अविनाश सिंह की रिपोर्ट के आधार पर धारा 307 जोड़ी। शिकायत पर सीएमएचओ ने दो सदस्यीय जांच टीम बनाई। जांच अधिकारी डॉ. मनीष श्रीवास्तव और डॉ. श्रीकेश कुमार गुप्ता ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट उल्लेख किया है कि मरीज 16 जुलाई 2022 को भर्ती हुआ और 17 जुलाई की सुबह डिस्चार्ज हो गया। सिम्स के डॉक्टर 20 अगस्त को क्यूरी रिपोर्ट दी जिसमें मरीज की चोट को साधारण बताया गया।
•पुलिस विभाग के तय नियमों के अनुसार किसी भी तरह का लेन देन प्रतिबंधित
पुलिस विभाग के तय नियमों के अनुसार किसी भी मामले की जांच पूरी होने तक जांच अधिकारी (विवेचक) प्रार्थी या आरोपी किसी भी पक्ष से किसी भी तरह का लेन देन नहीं कर सकता है। इस मामले की रिपोर्ट 16 जुलाई 2022 को दर्ज कराई। इसके तीन माह बाद यानी जांच के दौरान ही विवेचक एएसआई हेमंत सिंह ने 7 सितंबर को जमीन की रजिस्ट्री अपनी पत्नी के नाम पर कराई, जो कि विवेचना के दौरान की गई है।