विवेकानंद जयंती के अवसर पर विश्वाधारम सामाजिक संस्था द्वारा रक्तदान शिविर एवम युवा सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन,’ भारत की अध्यात्म शक्ति को विश्व में स्थापित करने का कोई कार्य किया है तो वह स्वामी विवेकानंद जी ने किया’ : अरुण साव

बिलासपुर। विश्वा धारम सामाजिक संस्था के द्वारा विवेकानंद जयंती के अवसर पर आज रक्त दान शिविर एवम युवा सम्मान समारोह कार्यक्रम का आयोजन एक निजी होटल में किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, मुख्य महाप्रबंधक (एनटीपीसी) रमानाथ पुजारी, संरक्षक दिलेश्वर कोशिल आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का उद्घाटन अतिथियों के द्वारा दीप प्रज्जवलित एवम विवेकानंद जी के तेल चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया। तत्पश्चात संस्था के अध्यक्ष चंद्रकांत साहू ने अपना स्वागत भाषण देते हुए कहा कि जो कार्य अक्सर लोग कई वर्षो में नही कर पाते हमारी संस्था द्वारा मात्र 02 वर्षो में कर दिखाया है। हमने गांव गांव, गली गली में रक्त दाताओं को खोज खोज कर रक्त दान कराया है। और मात्र एक वर्ष में हमने 48 सौ रक्त दान कराया है। एकत्र की गई रक्तो से जरूरत मंद लोगो की मद्दत हो सकेगी। खासकर सिकलिन से पीड़ित मरीजों की जिन्हे हर माह खून की आवश्यकता पड़ती है।

उन्होंने कहा कि हमारी संस्था के द्वारा करोना काल में भी जरूरत मंदो की हर संभव मद्दत पहुचाई गई। हमारी संस्था द्वारा अनेक सामाजिक कार्यों के माध्यम से लोगो की लगातार मद्दत की जा रही है।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने युवा दिवस की बधाई देते हुए कहा कि 12 जनवरी 1863 का वो दिन है जिस दिन स्वामी विवेकानंद जी का अवतरण हुआ था। नरेंद्र नाथ दत्त से स्वामी विवेकानंद बनने का का सफर मात्र 39 साल की आयु की रही। लेकिन इतने कम समय में भी उन्होंने जो उपलब्धि हासिल की वह अदभुद और अकल्पनीय है। इतने कम समय में उन्होंने भारत की अध्यात्म संस्कृति का परचम पूरी दुनिया में फहराया। 11 सितंबर 1893 का वह एतिहासिक पल जब अमेरिका के शिकागो शहर के विश्व धर्म संसद में उन्होंने भारतीय अध्यात्मिक उदघोष किया और पूरी दुनिया को भारत की अध्यात्म शक्ति को मानने को मजबूर कर दिया। भारत की अध्यात्म शक्ति को विश्व में स्थापित करने का कोई कार्य किया है तो वह स्वामी विवेकानंद जी ने किया ।

उन्होंने लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति का घोर विरोध किया। उनके अनुसार यह शिक्षा पद्धति सिर्फ किताबी ज्ञान थी। यह भारत की शिक्षा पद्धति को अलग दिशा में ले जा रही थी। जो मैकाले की शिक्षा पद्धति थी वह बाबू बनाने वाला था। जिसने भारत को बहुत नुकसान पहुंचाया।
‘ जागो, उठो और तब तक मत रूको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाय।’ उनका यह शब्द नवजवानों को प्रेरणा देने वाला है। जात पात, छुआ छूत से हटकर चरित्रवान बनने का संदेश विवेकानंद जी ने दिया। एक नरेंद्र दत्त ने 18 सितंबर 1883 को भारतीय स्वाभिमान भारतीय अध्यात्म का संदेश का पताका अमेरिका के शिकागो में फहराया। तो वही एक नरेंद्र मोदी ने 22 जनवरी 2024 को भारत का स्वाभिमान जगाने वाला है,और दुनिया को संदेश देने वाला है कि ये भारत की धरती कैसे अध्यात्म पर आधारित है।
कार्यक्रम को पूर्व मंत्री कृष्ण मूर्ति बांधी, बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला, एनटीपीसी के मुख्य प्रबंधक रमानाथ पुजारी, संरक्षक दिलेश्वर कोसिल आदि ने भी संबोधित किया।
कार्यक्रम में रक्तदाताओं को मेमिनटम एवम प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे।कार्यक्रम का कुशल संचालन शरद यादव द्वारा किया गया।