• सुप्रसिद्ध लेखक/ साहित्यकार लोकेश शरण ने स्वामी आत्मानंद विद्यालय, कोनी के छात्रों को लेकर गए शैक्षणिक भ्रमण में “ताला” •छात्र – छात्राओ ने प्राचीन पुरातात्विक स्थल घुमने का खूब लिया आनंद •सर्वश्रेष्ठ यात्रा वृतांत लिखने वाले तीन छात्र – छात्राओ को पुरस्कृत भी किया गया

बिलासपुर । आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोनी के छात्र छात्राओं को जिला के प्रसिद्ध प्राचीन पर्यटन स्थल ‘ताला’ गांव जाने का सुखद अवसर मिला।

दरअसल अगस्त माह में आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, कोनी में सुप्रसिद लेखक, साहित्यकार एवं वरिष्ठ पत्रकार लोकेश शरण पढ़ाने गए हुए थे, तभी उन्होंने वहां के बच्चों को आश्वासन दिया था कि ज्ञानवर्धन के लिए बिलासपुर जिला के किसी प्राचीन पुरातात्विक स्थल पर घुमाने ले कर चलेंगे।

जिसके लिए रविवार का दिन तय किया गया। लगभग 60 छात्र छात्राओं का चयन कर उन्हें इस शैक्षणिक भ्रमण पर आलेख लिखने तथा साथ में कापी- पेन भी ले चलने की सलाह दी गई। साथ ही यह भी घोषणा की गई कि सर्वश्रेष्ठ यात्रा वृतांत लिखने वाले तीन छात्र छात्रों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। इन छात्रों में नौवीं से बारहवीं तक के छात्र शामिल थे।

दिन का खाना के लिए सभी ने टिफिन बाक्स रखा था। नाश्ते की व्यवस्था ‘ताला’ गांव में की गई थी। यात्रा के लिए दो स्कूली बसों की व्यवस्था की गई। यात्रा सुबह 10.30 से प्रारंभ हुई। 12.30 तक सभी सकुशल पहुंच गए। थोड़ा विश्राम और नाश्ते के बाद सभी इसके प्राचीन पुरातात्विक अवशेषों का अध्ययन करने चल पड़े।

वहां के केयर टेकर अमित सिंह ने पुरास्थलों का भ्रमण कराया और छात्रों के सवालों का पूर्णमनोयोग से जवाब दिया। सभी छात्र संतुष्ट नजर आ रहे थे। जब भोजन का समय हुआ विद्यालय की प्राचार्य श्रीमती अर्चना शर्मा ने अपने शिक्षकों व छात्रों को भोजन कर लेने हेतु सूचित की। संयोग से रविवार को ही ‘आंवला नवमी’ का त्योहार था। इस कारण प्रांगण में अवस्थित आंवला वृक्ष के नीचे बैठकर सभी ने भोजन का आनंद लिया। लंगूरों का यहां जमावड़ा रहता है। शारीरिक हानि तो नहीं पहुंचाते हैं, परंतु खाने-पीने की वस्तुओं को छीनने-झपटने की फिराक में रहते हैं। इसलिए नाश्ते और भोजन के समय इन लंगूरों से सुरक्षा के लिए कुछ लोगों को रखवाली के लिए लगाया गया था।

जिला के बिल्हा ब्लाक के अमेरी कापा पंचायत में स्थित ताला गांव, जिला मुख्यालय से लगभग 30 किमी दक्षिण दिशा में मनियारी नदी के बांये तट पर स्थित है। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण यह स्थल पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है। यहां स्थापित ‘रूद्र शिव’ की धातु से निर्मित मूर्ति पांचवीं-छठवीं शताब्दी में दक्षिण कोसल के शरभपुरीय राजवंश के काल में प्रचलित स्थापत्य कला से संबंधित भग्नावशेष माना जाता है। यह स्थल शैव केन्द्र के रुप में दूर-दूर तक प्रसिद्ध रहा है। यहां पर स्थित स्मारकों में जेठानी देवरानी मंदिर प्रसिद्ध तो है परंतु समुचित संरक्षण के अभाव में जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है। छात्रों को यहां एक म्युजियम भी देखने को मिला।

3.30 बजे वापसी का समय तय किया गया था। भोजन अवकाश के बाद शेष बचे रमणीक स्थानों का भी आनंद सभी ने लिया। सभी ने फोटोग्राफी भी खूब की। स्थानीय अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों आदि ने भी छात्र छात्राओं की इस यात्रा को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाया । सभी छात्र छात्राएं शाम 5 बजे सकुशल बिलासपुर पहुंच गए।
