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बिलासपुरराजनीति

जिला कांग्रेस कमेटी में गुटीय वर्चस्व की लड़ाई हुई तेज, कोटा विधायक को जिला कांग्रेस कमेटी ने किया निष्कासित ? 

बिलासपुर। नगर निगम चुनाव ठीक से अभी थमा भी नहीं कि कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई  तेज हो गई। मामला कांग्रेस पार्टी से बगावत कर चुनाव लड़ने एवं कुछ लोगों द्वारा पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों को भीतरघात कर हराने की बात पर शुरू हुई थी। जो मामला अब पार्टी के दो गुटों के नेता के बीच वर्चस्व की लड़ाई बन गई है।

बता दे कि शहर में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  एवं पूर्व उपमुख्यमंत्री टी एस सिंहदेव ये दो ही गुट के नेता दिखाई देते है। जिसमें जब भूपेश बघेल प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो भूपेश बघेल के गुट के नेताओं का ही बोलबाला था लेकिन जब से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गई है। भूपेश बघेल का गुट भी हाशिए में चला गया है। वही उनके गुट के कुछ नेताओं को उनके ही पार्टी के लोगो द्वारा किनारे लगाया जा रहा है। यह बात खुलकर तब सामने आई जब टी एस सिंहदेव के कल बिलासपुर आगमन पर उनके ही सामने कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव झलला पड़े और कुछ ऐसा कह गए जो कांग्रेस पार्टी में बवाल पैदा कर दिया।

दरअसल में कल पूर्व उप मुख्यमंत्री टी. एस. सिहदेव प्रदेश संयुक्त सचिव पंकज सिंह के घर पर भोजन के लिए आमंत्रित थे । जहां टी.एस. सिहदेव से मिलने एवं स्वागत के लिए शहर के अन्य कांग्रेसजन भी उपस्थित थे। जहां कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव भी उपस्थित थे। इसी बीच कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव ने जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण ) के जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी पर सार्वजनिक टिप्पणी करते हुए कहा कि “तुमने मेरे सिने में छुरा घोपा है” साथ ही उन्होंने मीडिया में बयांन दिया कि “चपरासी कलेक्टर को निकाल रहे है।”

ये बाते अटल श्रीवास्तव ने नगर निगम व पंचायत चुनाव में कांग्रेस पार्टी के आधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ भीतरघात एवं खुलाघात करने वालो को संगठन द्वारा निष्कासित किये जाने के सन्दर्भ में नाराज होकर कहा। और उनके इसी बयान को लेकर कांग्रेस पार्टी में बवाल मच हुआ है।

जिला कांग्रेस कमेटी के ग्रामीण एवं शहर जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी एवं विजय पांडेय दोनो जिलाध्यक्ष ने पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज को पत्र लिख कर कहा कि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता व पूर्व उप मुख्यमंत्री  टी. एस. सिहदेव के समक्ष अपनी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष (ग्रामीण) के प्रति जनप्रतिनिधि द्वारा अपमान जनक टिप्पणी करते हुए संगठन के जिला प्रमुख को “चपरासी” कहना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। यह संगठन की अवमानना एवं अनुशासन हीनता की दायरे में आता है। बिलासपुर नगर निगम चुनाव 2025 में विभिन्न वार्डों में कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव अपने समर्थको को टिकट दिलाना चाहते थे परन्तु वे लोग तय मापदंडो के अनुरूप नहीं थे इसलिए प्रदेश चयन समिति से उर्जावान व पार्टी के प्रति समर्पित सभी कार्यकर्ताओ को टिकेट दी गयी, परन्तु अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ खुलाघात एवं भीतरघात किये जाने कि शिकायत मिली व इस सम्बन्ध में लिखित प्रमाण भी प्रस्तुत किये गए तब लिखित शिकायत के बाद इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी के संविधान एवं नियम की पुस्तिका के अनुशासनात्मक नियम की कंडिका 4 में उल्लेखित नियमो व कांग्रेस की प्राथमिक सदस्यता के अंतर्गत की जाने वाली घोषणा के कंडिका 8 के उल्लंघन किये जाने पर जिलाध्यक्ष (ग्रामीण एवं शहर) द्वारा प्राथमिक सदस्यता से छः वर्ष के लिए निष्कासित किया गया।

जिलाध्यक्षो ने पार्टी के नियमानुसार ही कार्यवाही की है, परन्तु इस कार्यवाही को कोटा विधायक ‌द्वारा व्यक्तिगत, द्वेषपूर्ण व जान बूझकर किये जाने की मंशा से मीडिया में अशोभनिय बयांन दिया जा रहा है। उन्हें यह स्पस्ट करना चाहिए कि जिस जिला कांग्रेस कमेटी के अंतर्गत उनकी खुद प्राथमिक सदस्यता है उसकी कमेटी के अध्यक्ष को “चपरासी” कहना कितना उचित है। वही जिन्होंने पार्टी को नुकसान पहुंचाया।

निगम चुनाव में अधिकृत प्रत्याशियों को हराने का काम किया उन्हें कोटा विधायक ‘कलेक्टर” बता रहे है। इस संबंध में आप स्वयं विवेक पूर्ण विचार करे कि उनका यह बयान कितना अनुचित है।

इस निष्काषन के बाद पार्टी में बवाल मच गया किया। विधायक अटल श्रीवास्तव के समर्थक अटल के इस निष्कासन की अनुचित बताते हुए आक्रोशित है । वही टीएस सिंहदेव का गुट इस कार्यवाही को उचित ठहरा रहे है। इस बीच दोनो गुटों के बीच बयान बाजी तेज हो गई है अब देखना होगा कि इस कार्यवाही पर पीसीसी प्रेसिडेंट दीपक बैज की क्या प्रतिक्रिया आ रही है। तब तक के लिए हमें इंतजार करना होगा।