डी.पी. विप्र महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन
छात्र-छात्राओं में दिखा योग के प्रति उत्साह

बिलासपुर। डी.पी. विप्र स्वशासी महाविद्यालय में 21 जून 2025 को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस बड़े ही धूमधाम और गरिमामय वातावरण में मनाया गया। महाविद्यालय परिसर में आयोजित इस भव्य आयोजन में विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस), राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) और खेल विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ।

इस आयोजन का नेतृत्व महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. अंजू शुक्ला के निर्देशन में किया गया, जिनके मार्गदर्शन में महाविद्यालय निरंतर शैक्षणिक एवं सामाजिक गतिविधियों में अग्रणी भूमिका निभाता आ रहा है।
सैकड़ों प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 6:30 बजे महाविद्यालय परिसर में ओम मंत्र एवं गायत्री मंत्र के सामूहिक उच्चारण के साथ हुई। महाविद्यालय के प्रांगण में छात्र-छात्राओं की विशाल उपस्थिति इस बात का प्रमाण थी कि आज की युवा पीढ़ी योग के महत्व को समझ रही है और उसे अपनाने के लिए तत्पर है।
इस योग सत्र में प्रतिभागियों को सूर्य नमस्कार, अनुलोम-विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, भुजंगासन, त्रिकोणासन, कपालभाति, ताड़ासन, वज्रासन, पवनमुक्तासन, एवं शवासन जैसी विविध योग मुद्राएँ कराई गईं। योग प्रशिक्षकों ने उपस्थितजनों को प्रत्येक आसन का वैज्ञानिक आधार समझाया और इसे दैनिक जीवन में शामिल करने के लिए प्रेरित किया।
प्रमुख शिक्षकों एवं अधिकारियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में महाविद्यालय के उप प्राचार्य डॉ. एम.एस. तंबोली, डॉ. मनीष तिवारी, डॉ. अजय यादव, एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. किरण दुबे, डॉ. आशीष शर्मा, प्रो. यूपेश कुमार चंद्राकर, वित्त अधिकारी श्री संग्राम चंद्रवंशी, श्री शिव मंगल सिंह सहित महाविद्यालय के समस्त शिक्षकगण और कर्मचारीगण उपस्थित रहे।
सभी विभागों के प्रमुख शिक्षकों ने भी अपनी सहभागिता से कार्यक्रम को सफल बनाया। इनमें प्रमुख रूप से डॉ. ऋचा हांडा, प्रोफेसर ए. श्रीराम, डॉ. संजय तिवारी, डॉ. विवेक अंबलकर, डॉ. एम.एल. जायसवाल, डॉ. तरु तिवारी, डॉ. साधना, प्रो. निधीश चौबे, डॉ. अशुतोष पांडे श्री शैलेन्द्र तिवारी के नाम उल्लेखनीय हैं।
प्राचार्य एवं उप प्राचार्य का संदेश
इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. अंजू शुक्ला ने कहा कि –
> “योग भारतीय संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। यह केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है, जो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक रूप से सशक्त बनाती है। आज पूरा विश्व योग के महत्व को समझ रहा है और भारतीय संस्कृति के इस उपहार को स्वीकार कर रहा है। विद्यार्थियों को अपने जीवन में योग को नियमित रूप से अपनाना चाहिए।”
वहीं उप प्राचार्य डॉ. एम.एस. तंबोली ने अपने उद्बोधन में कहा कि –
> “आज की जीवनशैली में योग एक अनिवार्य हिस्सा बन गया है। पढ़ाई, प्रतियोगिता और करियर के दबाव में युवा जिस तनाव का सामना कर रहे हैं, उससे मुक्त होने का सबसे प्रभावी साधन योग ही है। योग मन को स्थिर करता है और शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।”
एनएसएस, एनसीसी और खेल विभाग की विशेष भूमिका
एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी डॉ. किरण दुबे ने विद्यार्थियों को योग और सामाजिक जीवन के बीच के संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति स्वयं स्वस्थ रहता है तो समाज के लिए भी सकारात्मक योगदान दे सकता है।
एनसीसी और खेल विभाग ने भी इस आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनसीसी कैडेट्स एवं खेल विभाग के छात्र-छात्राओं ने पूरे अनुशासन के साथ योगाभ्यास किया।
एनएसएस स्वयंसेवकों ने पूरे कार्यक्रम में प्रतिभागियों को सहयोग प्रदान किया और आयोजन स्थल पर अनुशासन, व्यवस्था और समन्वय बनाए रखा।
स्वस्थ भारत के निर्माण की ओर एक कदम
महाविद्यालय परिसर में योग के दौरान वातावरण में ऊर्जा, सकारात्मकता और एक विशेष प्रकार की आत्मिक शांति का अनुभव किया गया।
कार्यक्रम का समापन ‘शांति पाठ’ के साथ किया गया, जिसमें सभी ने देश, समाज और स्वयं के स्वास्थ्य के लिए मंगलकामनाएं कीं। इसके पश्चात प्रतिभागियों के लिए स्वास्थ्यवर्धक नाश्ते की व्यवस्था की गई।
महाविद्यालय में निरंतर होता रहेगा योग का अभ्यास
डी.पी. विप्र स्वशासी महाविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों ने यह भी संकल्प लिया कि योग दिवस केवल एक दिन का उत्सव नहीं रहेगा, बल्कि इसे प्रतिदिन जीवन का हिस्सा बनाया जाएगा। नियमित योग अभ्यास के लिए महाविद्यालय में विशेष सत्रों का आयोजन भी किया जाएगा, ताकि विद्यार्थियों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ किया जा सके।
कार्यक्रम को सफल बनाने में एनएसएस, एनसीसी, खेल विभाग, प्रशासनिक स्टाफ और समस्त महाविद्यालय परिवार की सक्रिय सहभागिता रही।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर डी.पी. विप्र महाविद्यालय परिवार ने ‘स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, स्वस्थ समाज’ का संदेश दिया।