०ठेका श्रमिकों को काम से हटाया गया बिना कारण, ०अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय पर गंभीर आरोप श्रमिकों ने लगाई न्याय की गुहार ०टेंडर प्रक्रिया में भी गड़बड़ी का आरोप

बिलासपुर। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय कोनी, बिलासपुर में कार्यरत ठेका श्रमिकों (सुरक्षा गार्ड व सफाईकर्मी) को 1 अगस्त 2025 से बिना किसी कारण कार्य से हटा दिया गया है। इन श्रमिकों का कहना है कि न तो उन्हें कोई लिखित सेवा समाप्ति आदेश दिया गया, न आरोप पत्र, न ही जांच प्रक्रिया अपनाई गई, और न ही किसी प्रकार का मुआवजा या बकाया वेतन प्रदान किया गया।
श्रमिकों ने बताया कि वे बुंदेला सिक्योरिटी सर्विसेस कंपनी के अधीन कार्यरत थे और जबसे शिकायत के बाद न्यूनतम वेतन 409 रुपये प्रति दिन के हिसाब से भुगतान शुरू हुआ, तबसे उन्हें प्रबंधन द्वारा प्रताड़ित किया जाने लगा। पूर्व में उन्हें केवल ₹200 (सफाई महिला कर्मचारियों) और ₹250 (गार्ड कर्मचारियों) की दर से वेतन दिया जा रहा था, जिसे लेकर उन्होंने 23 अप्रैल 2024 को सहायक श्रमायुक्त कार्यालय में शिकायत की थी।
श्रमिकों का आरोप है कि संस्थान ने ठेकेदार बदलते समय भी नियमों का पालन नहीं किया। नए ठेकेदार से टेंडर संबंधित कोई सूचना समाचार पत्रों में प्रकाशित नहीं की गई। इसके उलट, आरोप है कि नए ठेकेदार द्वारा 50-50 हजार रुपये लेकर नई भर्ती की जा रही है। इसके विरुद्ध श्रमिकों ने रोक लगाने की मांग की है।
इसके साथ ही, श्रमिकों ने यह भी आरोप लगाया कि उनके भविष्य निधि की राशि भी ठेकेदार व नियोक्ता द्वारा पूरा जमा नहीं किया गया, जिसकी शिकायत उन्होंने 9 दिसंबर 2024 को ईपीएफ कार्यालय में दर्ज कराई थी। अब इसी रंजिश के चलते उन्हें काम से हटाया गया है।
श्रमिकों का कहना है कि श्रम विभाग द्वारा विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को कई बार नोटिस भी जारी किए गए, और 25 अगस्त 2025 को अगली सुनवाई भी निर्धारित है। ऐसे समय में श्रमिकों को कार्य से हटाया जाना, श्रम कानूनों का उल्लंघन है।
श्रमिकों की मांगें:
1. हटाए गए श्रमिकों को तत्काल पुनः कार्य पर लिया जाए।
2. बकाया वेतन, मुआवजा, ग्रेच्युटी व अन्य लाभों का भुगतान किया जाए।
3. नई भर्ती प्रक्रिया में हो रही गड़बड़ियों की जांच की जाए व टेंडर निरस्त किया जाए।
4. दोषी ठेकेदार व अधिकारियों पर श्रम कानूनों के तहत कार्रवाई की जाए।
श्रमिकों ने कलेक्टर व सहायक श्रमायुक्त से त्वरित हस्तक्षेप की मांग की है ताकि उन्हें न्याय मिल सके और आगे किसी श्रमिक के साथ इस प्रकार का अन्याय न हो।