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बिलासपुर

बिलासपुर जिले में 500 एकड़ शासकीय भूमि चढ़ गई निजी नामों में!

बेलगहना तहसील के 4 गांवों में बड़ा जमीन घोटाला, तहसीलदार की कार्रवाई के बाद भी फाइल पर लगा रहस्य

बिलासपुर। जिले में शासकीय जमीन पर बड़ा खेल सामने आया है। तहसील बेलगहना के ग्राम खोंगसरा, आमागोहन, टाटीधार और मोहली में वर्ष 2022-23 के दौरान करीब 488.69 एकड़ शासकीय भूमि 278 निजी नामों में दर्ज कर दी गई।

हल्का क्रमांक 01 के पटवारी और हल्का क्रमांक 02 के पटवारी ने इस अनियमितता की जानकारी होने पर रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार को सौंपी थी। इसके बाद तहसीलदार ने नोटिस जारी कर संबंधितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज करते हुए फाइल उच्च स्तर पर भेज दी।

लेकिन इसके बाद से मामला ठंडे बस्ते में चला गया। ग्रामीणों और जागरूक लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि – क्या राजस्व विभाग ने फाइल दबा दी है? या फिर कार्रवाई के नाम पर केवल खाना-पूर्ति की गई?

किसके नाम चढ़ी कितनी जमीन?

जांच में यह भी सामने आया है कि किसी व्यक्ति के नाम 1 एकड़ तो किसी के नाम 5 से 10 एकड़ तक शासकीय भूमि दर्ज हो गई। इसमें सामान्य वर्ग से लेकर अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़े वर्ग और मुस्लिम समाज तक के लोग शामिल हैं।

कई बड़े नाम और दर्जनों मामले

प्रकरण में शामिल लोगों की सूची लंबी है, जिनमें छाजूराम पिता पूरनमल, शिवा सिंह उइके पिता कृष्ण कुमार उइके, नारायणदास-गणेशदास-रमेशदास पिता कुंवरदास, रामखिलावन पिता धिनु, सुरेशचंद्र पिता छोटेलाल, मुरतिया बाई पति रामाधार, मुन्नी देवी पति शिवसिंह, गणेश सिंह पिता महेंद्र, रहीशा बेगम पति मुस्ताक अहमद, गनी खान पिता अहमद मुस्ताक, बालकरण पिता लल्ली प्रसाद, रामकिशन पिता गोरेलाल जैसे कई नाम सामने आए हैं।

कुल मिलाकर 278 अलग-अलग नामों में शासकीय भूमि का फर्जी या संदिग्ध नामांतरण किया गया है।

सवालों के घेरे में राजस्व विभाग

मामले में तहसील स्तर पर कार्रवाई की शुरुआत तो हुई, लेकिन उसके बाद फाइल पर सन्नाटा छा गया है। न तो आगे की जांच की जानकारी मिल रही है और न ही दोषियों पर कोई ठोस कदम उठाए गए हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि –

“अगर अधिकारियों ने सख्त कार्रवाई की होती तो इतने बड़े पैमाने पर शासकीय भूमि पर कब्जा संभव ही नहीं था। लगता है ऊपर तक मामला सेट कर दिया गया है।”

अब नजर उच्चाधिकारियों पर

करीब 500 एकड़ शासकीय भूमि का निजी नामों में दर्ज होना एक गंभीर राजस्व घोटाला माना जा रहा है। अब सबकी नजर जिला प्रशासन और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर है कि वे इस मामले को गंभीरता से लेकर दोषियों पर कार्रवाई करते हैं या फिर यह फाइल हमेशा के लिए अलमारी में दबकर रह जाएगी।