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बिलासपुर

वीडियो। एनएचएम के कर्मचारियों की बर्खास्तगी के बाद , सामूहिक इस्तीफे का ऐलान, सरकार पर बढ़ी दबाव, स्वास्थ्य सेवाएं ठप

बिलासपुर। नेशनल हेल्थ मिशन (एनएचएम) के कर्मचारी अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से हड़ताल पर हैं। हड़ताल के दौरान सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव इतना बढ़ गया कि अब मामला सामूहिक इस्तीफे तक पहुंच गया है। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने आधे-अधूरे फैसले लेकर उन्हें गुमराह किया और जब विरोध तेज हुआ तो 25 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। इसके जवाब में बिलासपुर जिले के 735 कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफे का ऐलान कर दिया है।

आंदोलनरत कर्मचारी

10 सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी

एनएचएम कर्मचारी लंबे समय से अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इनमें नियमितीकरण, वेतनवृद्धि, स्थायी पदों पर नियुक्ति, बीमा सुरक्षा और कार्यस्थल पर सुविधाओं जैसी मांगे शामिल हैं। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से अनुबंध पर काम कर रहे हैं लेकिन सरकार ने अब तक उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया।

शुभा गढ़वाल CMHO,बिलासपुर

13 अगस्त को हुई बैठक में सरकार ने 10 में से 5 मांगों पर सहमति जताई थी, लेकिन कर्मचारियों ने इसे अस्वीकार कर दिया। उनका कहना है कि “आधे-अधूरे फैसलों” से उनकी समस्याओं का समाधान नहीं होगा।

बर्खास्तगी के बाद इस्तीफे की चेतावनी

तनाव उस समय और बढ़ गया जब सरकार ने 25 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया। इस कदम से नाराज होकर एनएचएम के अफसरों और कर्मचारियों ने सामूहिक इस्तीफे का ऐलान कर दिया। बिलासपुर जिले में ही 735 कर्मचारियों ने एक साथ इस्तीफे पत्र सौंप दिए और कहा कि यह केवल “कागजी इस्तीफा” नहीं है बल्कि सरकार के खिलाफ आक्रोश का प्रतीक है।

श्याम मोहन दुबे (प्रदेशाध्यक्ष NHM)

कर्मचारियों का कहना है कि सरकार उन्हें डराने और दबाव बनाने की रणनीति अपना रही है, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी 10 मांगें पूरी नहीं होंगी, आंदोलन जारी रहेगा।

महिला कर्मचारियों की पीड़ा

आंदोलन में शामिल महिला कर्मचारियों ने भी अपनी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि उन्हें मात्र 10 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। बढ़ती महंगाई में इतने कम वेतन में घर चलाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि सरकार चुनावों के दौरान वादे करती है लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें भूल जाती है।

स्वास्थ्य सेवाएं ठप

हड़ताल और इस्तीफे की घोषणा से प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित हो गई हैं। गांव-गांव के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और उपकेंद्रों में ताले लटक गए हैं। टीकाकरण अभियान ठप हो गया है, गर्भवती महिलाओं की जांच और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी तरह से बाधित हो गई हैं। इससे आमजन स्वास्थ्य संकट से जूझ रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो प्रदेश में डेंगू, मलेरिया और अन्य मौसमी बीमारियों से निपटना मुश्किल हो जाएगा।

सरकार और कर्मचारियों के बीच टकराव

सरकार की ओर से संदेश दिया गया है कि कर्मचारियों को बातचीत के लिए तैयार रहना चाहिए, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहा है, ठोस कार्रवाई नहीं। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार “छल” कर रही है और वादाखिलाफी कर रही है।

आगे क्या?

कर्मचारियों का आंदोलन फिलहाल तेज होता जा रहा है। सामूहिक इस्तीफे के ऐलान ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। एक ओर स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं, वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों का गुस्सा लगातार बढ़ रहा है। अब देखना होगा कि सरकार इस संकट से निपटने के लिए क्या ठोस रणनीति अपनाती है और क्या कर्मचारियों की मांगें पूरी होती हैं या यह संघर्ष और लंबा खिंचता है।