लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन का 55 वां दिन: 113 परिवारों के घर बचाने सड़क पर उतरे लोग .देखिए वीडियो…..!

बिलासपुर। लिंगियाडीह क्षेत्र में वर्षों से निवास कर रहे 113 परिवारों के मकानों को तोड़े जाने के विरोध में “लिंगियाडीह बचाओ आंदोलन” लगातार 55 वें दिन भी जारी रहा। नगर निगम द्वारा गार्डन और अन्य परियोजनाओं के नाम पर मकान हटाने की कार्रवाई के खिलाफ क्षेत्रवासी एकजुट होकर धरने पर बैठे हैं।

क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे पिछले 50 वर्षों से लिंगियाडीह में रह रहे हैं और उनका निवास वहीं बनाए रखा जाए। इससे पहले 19 मार्च 2025 को सैकड़ों मकान और दुकानें तोड़ी गई थीं, जिनका आज तक कोई समुचित पुनर्वास नहीं हो पाया है।

पट्टा और प्रधानमंत्री आवास की मांग
आंदोलनकारियों ने बताया कि वर्ष 2019 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लिंगियाडीह को आबादी क्षेत्र घोषित किया गया था और पट्टा वितरण के लिए 10 रुपये प्रति वर्गफुट की प्रीमियम राशि भी जमा कराई गई थी। इसके बावजूद आज तक स्थायी पट्टा नहीं दिया गया। उन्होंने मांग की कि शासन उन्हें स्थायी पट्टा दे और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान निर्माण की राशि प्रदान करे, ताकि वे अपने घर सुरक्षित तरीके से बना सकें।

जनसहमति से हो विकास कार्य
मांग पत्र में कहा गया है कि लिंगियाडीह में सड़क और अन्य निर्माण कार्य मोहल्लेवासियों और जनप्रतिनिधियों की सहमति से ही किए जाएं। यह भूमि मास्टर प्लान के अनुसार आबादी क्षेत्र में आती है, इसलिए नियमानुसार पट्टा दिया जाना चाहिए।

बयान वापस लेने की मांग
महापौर, नगर आयुक्त और जोन कमिश्नर द्वारा दैनिक भास्कर अखबार में दिए गए उस बयान पर भी आपत्ति जताई गई है, जिसमें यहां मकान तोड़कर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और गार्डन बनाने की बात कही गई थी। आंदोलनकारियों ने मांग की है कि इस बयान को सार्वजनिक रूप से वापस लिया जाए।
डर का माहौल खत्म करने की मांग
क्षेत्रवासियों का आरोप है कि निगम कर्मचारी रोज आकर यह कहते हैं कि नाली के बाद 20 फीट और तोड़ा जाएगा, जिससे लोग भयभीत रहते हैं। इस तरह की चेतावनियों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
गरीब सब्जी विक्रेताओं को राहत
पिछले 30 वर्षों से यहां हर शाम गरीब लोग 3 घंटे सब्जी दुकान लगाकर जीवन यापन करते हैं, लेकिन अब निगम द्वारा उनकी सब्जी जब्त की जा रही है। मांग की गई है कि उन्हें वहीं पर सब्जी बेचने की अनुमति दी जाए।
अन्य क्षेत्रों में भी कार्रवाई रोकने की मांग
चिंगराजपारा, चांटीडीह, मोपका, खमतराई, बहतराई जैसे आसपास के इलाकों में भी निगम की तोड़फोड़ कार्रवाई पर रोक लगाने और जनप्रतिनिधियों की सहमति से काम करने की मांग उठी है।
मुख्यमंत्री की घोषणा का हवाला
आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की 09 फरवरी 2025 को वसंत विहार चौक में दी गई उस घोषणा का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि जहां लोग कच्चे मकान में रह रहे हैं, वहीं उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान दिया जाएगा और किसी का मकान नहीं तोड़ा जाएगा। इसी घोषणा के आधार पर पट्टा देने की मांग की गई है।
बार-बार बदलती परियोजनाओं पर सवाल
नगर निगम द्वारा पिछले चार महीनों में तीन अलग-अलग परियोजनाओं के नाम पर सर्वे और तोड़फोड़ की चेतावनी दी गई है, जिससे लोगों में असमंजस और अविश्वास का माहौल बन गया है। 10 महीने पहले करीब 150 मकान और दुकानें सड़क चौड़ीकरण के नाम पर तोड़ी गई थीं, लेकिन आज तक वहां निर्माण शुरू नहीं हुआ। अब फिर से कार्रवाई की बात से लोग मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं।
सर्वदलीय समर्थन
धरने में सर्व समाज के नेता डॉ. रघु साहू ने कहा कि साहू समाज सहित सभी वर्ग इस आंदोलन का समर्थन करेंगे,धरने में यशोदा पाटिल, श्याम मूरत कौशिक, कुंती तिवारी, भोला राम साहू, प्रशांत मिश्रा, श्रवण दास मानिकपुरी, चतुर सिंह यादव, सिद्धार्थ भारती, डॉ. अशोक शर्मा सहित बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग और युवा मौजूद रहे।लोगों ने स्पष्ट कहा कि जब तक उन्हें न्याय और सुरक्षा नहीं मिलेगी, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।